लखनऊ। उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी तय करने की व्यवस्था अब काम की प्रकृति और महंगाई तक सीमित नहीं रहेगी। नई मजदूरी संहिता नियमावली-2026 में मानक श्रमिक परिवार की वास्तविक जरूरतों को भी आधार बनाया गया है। इसके तहत प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन, सालाना 66 मीटर कपड़े, भोजन-कपड़े की लागत का 10 प्रतिशत आवास तथा न्यूनतम मजदूरी का 20 प्रतिशत ईंधन-बिजली के लिए माना जाएगा। बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और आकस्मिक जरूरतों के लिए 25 प्रतिशत राशि जोड़ी जाएगी।
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एमकेएस सुंदरम के मुताबिक नई नियमावली ने पुराने प्रावधानों का स्थान लिया है। मानक परिवार में कर्मचारी, पति या पत्नी और दो बच्चे शामिल होंगे, जिन्हें तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया है। महंगाई भत्ते का पुनरीक्षण औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर साल में दो बार, एक अप्रैल और एक अक्टूबर से पहले होगा।
साप्ताहिक अवकाश पर काम कराने पर ओवरटाइम दर से भुगतान और वैकल्पिक विश्राम देना अनिवार्य होगा। कुल कटौती 50 प्रतिशत से अधिक होने पर अतिरिक्त राशि अगली अवधि में किस्तों में वसूली जाएगी। जुर्माने से पहले लिखित आरोप और सात दिन में जवाब का अवसर देना होगा। वेतन पर्ची में यूएएन, बैंक खाता, मूल वेतन, भत्ते, ओवरटाइम, पीएफ-ईएसआई कटौती और हाथ में मिलने वाली रकम का विवरण दर्ज करना होगा।