Ballywood: इस हफ्ते दमदार और नया देखने की तलाश में जुटे दर्शकों के लिए 'मालिक' एक ताज़ा सरप्राइज है. पुलकित के निर्देशन में बनी इस फिल्म में पहली बार राजकुमार राव और मानुषी छिल्लर की जोड़ी सिल्वर स्क्रीन पर नजर आई है. ट्रेलर से जो एक्साइटमेंट शुरू हुई थी, फिल्म उस पर खरा उतरती है – एक्शन, ड्रामा और इमोशन से भरपूर.
दीपक की बंदूक से भरी जिंदगी
फिल्म की कहानी इलाहाबाद की गलियों से शुरू होती है, जहां किसान का बेटा दीपक अपनी मेहनत से कुछ बनने का सपना देखता है. लेकिन हालात उसे गैंगस्टर बनने की राह पर ले जाते हैं. राजकुमार राव का स्वैग और किरदार की ग्रोथ दर्शकों को बांधे रखती है – खासकर तब, जब दीपक कानून और समाज के बीच झूलता है.
पुलकित का परिपक्व निर्देशन
हालांकि फिल्म की कहानी कुछ जगहों पर प्रेडिक्टेबल लग सकती है, लेकिन पुलकित का निर्देशन इसे फ्रेश ट्रीटमेंट देता है. हिंसा के दृश्य स्टाइलिश और टाइट हैं, लेकिन सिर्फ सनसनीखेज़ नहीं – इनका एक भावनात्मक वज़न भी है. सिनेमेटोग्राफी थोड़ी और रिच हो सकती थी, पर कहानी कहने का अंदाज़ बांध लेता है.
एक्टिंग: राजकुमार ने मारी बाज़ी
राजकुमार राव हर सीन में जान डालते हैं. उनके हावभाव, डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज – सब बेहतरीन हैं. सौरभ शुक्ला, स्वानंद किरकिरे और अंशुमान पुष्कर भी दमदार हैं. हालांकि मानुषी छिल्लर का अभिनय फिल्म की एकमात्र कमजोर कड़ी है – उनका किरदार उतना असर नहीं छोड़ता.
फाइनल वर्डिक्ट: पुरानी कहानी, नया असर
'मालिक' में भले ही कुछ खामियां हों, लेकिन राजकुमार राव की एक्टिंग और पुलकित का निर्देशन फिल्म को देखने लायक बनाता है. 90 के दशक की क्राइम वाइब्स और इलाहाबाद की पृष्ठभूमि में बुनी ये कहानी वीकेंड एंटरटेनमेंट का दमदार पैकेज है. हमारी तरफ से 3.5 स्टार्स.