RPF Inspector Chandana Sinha: भारतीय रेलवे केवल यात्रियों को मंज़िल तक पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि कई बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाने की मजबूत कड़ी भी बन रहा है। इसी कड़ी का नाम है ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते, जिसके तहत बच्चों को तस्करी, बाल मजदूरी और शोषण से बचाया जा रहा है। इस अभियान में असाधारण योगदान देने वाली RPF इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। लखनऊ मंडल में तैनात चंदना ने साल 2024 में 152 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके परिवारों से मिलाया।
बच्चों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता
चंदना सिन्हा ने बताया कि रेलवे कर्मी के रूप में यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों और कमजोर वर्ग की रक्षा उनका पहला दायित्व है। इसी सोच के साथ उन्होंने लगातार रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में निगरानी रखी और कई बच्चों को गलत हाथों में जाने से बचाया।
क्या है ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते RPF द्वारा वर्ष 2018 में शुरू किया गया विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य स्टेशन और ट्रेनों में मिले लावारिस, भटके या संदिग्ध हालात में दिखने वाले बच्चों को पहचानना, उन्हें सुरक्षित निकालना और परिवार या बाल कल्याण समिति तक पहुंचाना है, ताकि वे बाल श्रम या मानव तस्करी का शिकार न हों।
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कैसे पहचानती हैं खतरे में बच्चे
चंदना सिन्हा के अनुसार, बच्चों की पहचान आसान नहीं होती। इसके लिए वे रोज़ाना 10 घंटे से अधिक समय यात्रियों के बीच बिताती हैं। कई बार सिविल ड्रेस में रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। व्यवहार, हाव-भाव और बातचीत से धीरे-धीरे सच्चाई सामने आ जाती है।
इंटरनेट और सामाजिक कारण बड़ी चुनौती
चंदना बताती हैं कि 12 से 15 वर्ष के बच्चे अक्सर ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया के प्रभाव में घर छोड़ देते हैं। वहीं कुछ बच्चे माता-पिता की डांट से नाराज़ होकर निकल जाते हैं। रेस्क्यू के बाद बच्चों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग कराई जाती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।