मेरठ। एक दौर में भारतीय राजनीति में अत्यंत सम्मानित एवं कद्दावर नेता रही मेरठ की पहली सांसद मोहसीना किदवाई ने 94 वर्ष की आयु में दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही मेरठ के कांग्रेसियों में शोक की लहर दौड़ गई, क्योंकि यहां से दो बार सांसद रहते हुए मोहसीना के मेरठ के विकास में दिए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में मेरठ के बाशिंदों को जहां नौचंदी ट्रेन की सौगात दी थी, वहीं मेरठ के रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और उद्योग को नए आयाम दिए। मेरठ के ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए हस्तिनापुर और मेरठ को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए प्रयास किए और केंद्र सरकार के माध्यम से इन क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए प्रस्ताव रखे थे।
मोहसीना किदवाई का राजनीतिक सफर
1 जनवरी, 1932 को बाराबंकी में जन्मीं मोहसिना किदवई का इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से बेहद करीबी और विश्वसनीय रिश्ता था। छठी लोकसभा के उपचुनाव में वह आजमगढ़ से 1978 में जीती थी। सातवीं लोकसभा में 1980 में वह मेरठ से चुनाव लड़ी थी और जनता पार्टी के हरीश पाल को लगभग 57,217 वोटों से हरा कर मेरठ की पहली महिला सांसद बने का गौरव हासिल किया था। आठवीं लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर वह फिर से 1984 में मेरठ से चुनाव लड़ी थी और इस चुनाव में उन्होंने लोकदल के मंजूर अहमद को 96,518 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। वह दो बार छत्तीसगढ़ दो बार राज्यसभा सदस्य (2004-2016) भी रहीं।
सदन में हाईकोर्ट बेंच की मांग का पहला सवाल उठाया था
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कांग्रेसी नेता अजय त्यागी ने बताया, 1980 में जब मोहसीना किदवई पहली बार में मेरठ से लोकसभा का चुनाव लड़ने आई थी तो मेरठ बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट की मांग करते हुए चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। हालांकि बाद में मोहसीना के आश्वासन पर अधिवक्ता मान गए थे। मेरठ से पहली महिला सांसद बनते ही सदन में उन्होंने पहला सवाल भी मेरठ में हाईकोर्ट की मांग का उठाया था।
मेरठ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा
खरखौदा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा ने बताया, मोहसीना किदवई इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की बेहद करीबी और विश्वसनीय थीं। उनके मेरठ से सांसद होने के कारण इस क्षेत्र को केंद्र में एक मजबूत आवाज मिली, जिससे विकास परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में आसानी हुई। सांसद रहने के साथ-साथ वे केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण कैबिनेट पदों पर रहीं, जिसका सीधा लाभ मेरठ और आसपास के क्षेत्रों को मिला। उन्होंने अपने कार्यकाल में मेरठ के लोगों को नौचंदी ट्रेन की सौगात दी और रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण भी कराया। यहां के गन्ना किसानों की समस्या को देखते हुए चीनी मिल भी शुरू कराई थी। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने मेरठ को महानगर का दर्जा दिलाने के अथक प्रयास किए, ताकि मेरठ में बेहतर टाउन प्लानिंग की रूपरेखा तैयार की जा सके। इतना ही नहीं मेरठ को दिल्ली और अन्य पड़ोसी जिलों से जोड़ने वाली मुख्य सड़कों के चौड़ीकरण और मरम्मत के लिए केंद्रीय सहायता दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
औद्योगिक विकास और पर्यटन को दिया बढ़ावा
मोहसीना के कार्यकाल के दौरान मेरठ में लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमईएस) को काफी बढ़ावा मिला। विशेष रूप से खेल और कैंची उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उन्होंने नीतिगत प्रयास किए। उनके प्रभाव के कारण मेरठ के परतापुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया था। उन्होंने मेरठ के ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए हस्तिनापुर और मेरठ को पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास किए थे। उन्होंने केंद्र सरकार के माध्यम से इन क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए प्रस्ताव रखे थे।
पीएचसीएस स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका रही
स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उन्होंने क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं और टीकाकरण अभियानों को गति दी। उन्होंने मेरठ के लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं में सुधार के लिए विशेष फंड और संसाधन आवंटित करवाए। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसीएस) का जाल बिछाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। ताकि गांव के लोगों को इलाज के लिए शहर ना भागना पड़े।
मेरठ के टेलीफोन एक्सचेंजों का आधुनिकीकरण
80 के दशक के मध्य में जब भारत में संचार क्रांति की शुरुआत हो रही थी, तब मेरठ उन शुरुआती शहरों में शामिल था, जहां टेलीफोन एक्सचेंजों का आधुनिकीकरण किया गया। सांसद के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मेरठ को बेहतर संचार लाइनों से जोड़ा जाए, जिससे यहां के व्यापार को गति मिली। उनका योगदान मेरठ को दिल्ली के एक महत्वपूर्ण सैटेलाइट शहर के रूप में विकसित करना था, जिसका लाभ आज के आधुनिक मेरठ को मिल रहा है।
सांप्रदायिक सौहार्द बनाने के जमीनी प्रयास किए
80 के दशक में मेरठ ने सांप्रदायिक दौर देखा। उस समय मोहसिना ने एक सांसद के तौर पर जमीन पर रहकर शांति बहाली के काम किया। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम किया। ताकि शहर में कानून-व्यवस्था बनी रहे और विकास कार्य न रुकें। मेरठ के प्रति उनके लगावा असर यह है कि आज मेरठ को उद्योग और बेहतर टाउन प्लानिंग के रूप में देखा जा सकता है।