चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट से जुड़े चुनावी विवाद की सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने बताया कि दोबारा मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल रही है। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग अपने ही रिकॉर्ड के उपलब्ध नहीं होने की बात कैसे कह सकता है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर सभी उपलब्ध दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है।
रिकॉर्ड नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित क्यों नहीं हैं। अदालत ने कहा कि चुनाव कराना आयोग की मुख्य जिम्मेदारी है और इससे संबंधित दस्तावेजों को संभालकर रखना बेहद जरूरी है। आयोग की ओर से रिकॉर्ड तलाशने की बात कहे जाने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में सभी उपलब्ध रिकॉर्ड पेश किए जाएं।
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रिकॉर्ड पेश नहीं हुए तो प्रतिकूल निष्कर्ष की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यदि अगली सुनवाई तक संबंधित रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए, तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब रिकॉर्ड संबंधित उम्मीदवार को दिया गया था, तो उसे सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। कोर्ट के मुताबिक, मतगणना और दोबारा मतगणना से जुड़े दस्तावेज चुनावी विवादों में महत्वपूर्ण सबूत होते हैं। इनसे प्रक्रिया और नियमों के पालन की जांच की जा सकती है।
शृंगेरी सीट पर 201 वोटों से हुई थी कांग्रेस उम्मीदवार की जीत
कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर 2023 के चुनाव में कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा ने बीजेपी के डीएन जीवराजा को 201 वोटों से हराया था। जीवराजा ने नतीजे को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने डाक मतपत्रों की गिनती और खारिज किए गए मतपत्रों के सत्यापन में गड़बड़ी का आरोप लगाया। 6 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने 279 खारिज डाक मतपत्रों का दोबारा सत्यापन करने और सभी डाक मतपत्रों की पुनर्गणना का निर्देश दिया। इसके बाद मई में दोबारा मतगणना हुई, जिसमें संशोधित नतीजे में जीवराजा को 52 वोटों की बढ़त के साथ विजेता घोषित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने री-काउंटिंग के नतीजे पर लगाई थी रोक
दोबारा मतगणना के बाद टीडी राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट ने पहले खारिज किए गए डाक मतपत्रों की जांच का आदेश दिया था, लेकिन पुनर्गणना के दौरान पहले वैध माने गए मतपत्रों को भी अमान्य कर दिया गया। 11 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने माना कि रिटर्निंग ऑफिसर ने हाई कोर्ट के आदेश की सीमा से बाहर जाकर पहले वैध मतपत्रों की दोबारा जांच की। अदालत ने री-काउंटिंग के नतीजे के प्रभाव पर रोक लगाकर पहले वाली स्थिति बहाल करने का अंतरिम आदेश दिया, जिससे राजेगौड़ा फिलहाल विधायक के रूप में बहाल हुए। मामले में चुनाव एजेंट की शिकायत पर जीवराजा और कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी, हालांकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने बाद में आगे की जांच पर रोक लगा दी थी।