मेरठ। दलित महिला सुनीता की हत्या के बाद उनकी बेटी को अगवा करने वाले आरोपी पारस सोम की पैरवी के तीन अधिवक्ताओं का पैनल बना है। पैनल ने दावा किया है कि आरोपी नाबालिग है और एससी-एसटी कोर्ट ने उनके दावे की याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिस पर जल्द सुनवाई होगी। उधर, दस दिन बाद भी कपसाड गांव में बाहरी लोगों की पुलिस ने नो एंट्री कर रखी और गांव के लोगों को भी आधार कार्ड देखकर एंट्री दे रही हैं।
यह था मामला
पांच जनवरी को कपसाड गांव में दलित महिला सुनीता की हत्या कर गांव का युवक पारस सोम उनकी बेटी रूबी को अगवा कर ले गया था। रूबी की सकुशल बरामदगी और आरोपी पारस को गिरफ्तारी के लिए दस विशेष टीमें गठित की गई थी। 10 जनवरी को पुलिस ने हरिद्वार जिले के चुड़ियाला स्टेशन से पैंसेजर ट्रेन से रूबी को बरामद कर आरोपी पारस को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपी पारस को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया, जबकि आशा ज्योति केंद्र से काउंसलिंग के बाद परिजन 12 जनवरी को देर शाम रूबी को अपने साथ गांव ले गए थे। जेल में बंद आरोपी पारस सोम ने खुद को नाबालिग बताते हुए मदद मांग की थी।
18 साल से कम है आरोपी की उम्र
आरोपी पारस सोम नाबालिग है। यह दावा उनके अधिवक्ता बलराम सोम ने किया है। उनका कहना है किआरोपी पारस सोम का वर्ष 2024 में जारी हुआ हाई स्कूल परीक्षा का अंक पत्र मिला है। इस अंक पत्र में पारस की उम्र 11 मई, 2008 है। इसके मुताबिक उम्र 17 वर्ष 7 माह 28 दिन बैठ रही है। जनता आदर्श इंटर कॉलेज कपसाड़ द्वारा जारी किया गया एक प्रवेश पत्र भी मिला है। प्रवेश पत्र पर लगे फोटो को कॉलेज की तरफ से प्रमाणित भी किया गया है। दोनों ही प्रमाण पत्र और आधार कार्ड पारस को नाबालिग साबित करते हैं।
एससी/एसटी कोर्ट ने याचिका स्वीकार की
अधिवक्ता बलराम सोम ने बताया, पारस सोम का मुकदमा लड़ने के लिए तीन अधिवक्ताओं का पैनल बना है। पैनल में बलराम सोम, विजय शर्मा और संजीव राणा शामिल है। उन्होंने बताया, बुधवार को तीनों अधिवक्ताओं के पैनल ने एससी-एसटी कोर्ट आरोपी के नाबालिग होने की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।उन्होंने बताया, आरोपी को नाबिलग साबित करने के लिए कोर्ट में आधार कार्ड, दसवी की मार्कशीट और दसवीं की परीक्षा का प्रवेश पत्र लगाया गया है, जो आरोपी को नाबालिग साबित करने के लिए काफी है। दस्तावेजों के आधार आरोपी नाबालिग है। इसलिए मुकदमा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में ट्रांसफर कराना है। उन्होंने बताया, पैनल एक दो दिन में जेल में जाकर आरोपी से मुलाकात भी करेंगा।
कपसाड में दसवें दिन भी पुलिस का पहरा
घटना को दस दिन हो गए है। रूबी अपनों के बीच में आ गई और आरोपी पारस सोम भी जेल चला गया है, लेकिन कपसाड गांव से पुलिस का अभी पहरा नहीं हटा है। पुलिस ने कपसाड गांव जाने वाले सभी मार्गों पर बैरियर लगा रखे है और आधार कार्ड देखकर ही पुलिस ग्रामीणों को एंट्री दे रही है, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं करने दे रही है। इतना ही नहीं गांव की गलियों में भी पुलिस मुस्तैद है, जिसके कारण ग्रामीण परेशान है। इस मामले में फिलहाल पुलिस अधिकारी किसी भी सूरत में सुरक्षा व्यवस्था से समझौता करते नजर नहीं आ रहे हैं।