Mangal Dosh : हाल ही में सोनम गुप्ता ने सिर्फ एक माह में ही अपने पति को प्रेमी संग मिलकर मौत के घाट उतार दिया. आज यह खबर हर सोशल मीडिया से लेकर तमाम टीवी चनल व समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी हुई हैं. लेकिन क्या आपको पता है यदि कुंडली में मंगल दोष है तो आपका जीवन नरक बनने से कोई नहीं रोक सकता.. आइये जानते हैं क्या कहता है ज्योतिष? ..ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, पराक्रम और संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जब यह ग्रह किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में विशेष स्थानों पर स्थित होता है, तो यह मांगलिक दोष (Mangal Dosh) या कुज दोष उत्पन्न कर सकता है। यह दोष विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में तनाव या दांपत्य जीवन में असंतुलन का कारण बन सकता है।
जानें क्या कहता है ज्योतिष
मांगलिक दोष तब बनता है जब मंगल ग्रह कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो। इन स्थानों पर मंगल की स्थिति व्यक्ति की वैवाहिक जीवन से संबंधित भावनाओं, मानसिकता और पारिवारिक तालमेल को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि विवाह से पहले वर और वधू की कुंडलियों का मिलान करते समय मांगलिक दोष की विशेष जांच की जाती है। हालांकि, यह दोष सभी के लिए समान प्रभाव नहीं डालता। मांगलिक दोष की तीव्रता व्यक्ति की पूरी कुंडली पर निर्भर करती है। कई बार अन्य शुभ ग्रहों की दृष्टि या स्थिति इस दोष के प्रभाव को कम या समाप्त भी कर सकती है। इसके अलावा, जब दोनों वर-वधू की कुंडली में समान मांगलिक दोष हो, तो यह दोष आपस में संतुलित हो जाता है और नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता।
ग्रहों के खेल को समझना जरूरी
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मांगलिक दोष के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष पूजा-पाठ, मंगल के मंत्रों का जाप और कुछ वैदिक उपाय किए जा सकते हैं। साथ ही, सही जानकारी और मार्गदर्शन के साथ विवाह निर्णय लेने से भविष्य में समस्याओं से बचा जा सकता है। इसलिए, कुंडली में ग्रहों के इस अदृश्य खेल को समझना और सावधानीपूर्वक कदम उठाना आवश्यक है। हालांकि साइंस इसे कौरी कल्पना मानता है,
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लोकसत्य मीडिया संस्थान एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)