अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कजगम (एएमएमके) के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने शनिवार को तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि डीएमके और एआईएडीएमके के बीच भविष्य में गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि राजनीतिक समीकरण अक्सर विचारधारा के बजाय परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं। मदुरै में पत्रकारों से बात करते हुए दिनाकरन ने कहा कि राजनीतिक गठबंधनों को शामिल दलों के आधार पर अलग-अलग मापदंडों से नहीं देखा जाना चाहिए।
एक ही गठबंधन में रहना चाहिए
एएमएमके प्रमुख की यह टिप्पणी विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन की हालिया टिप्पणी के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए डीएमके और तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) को एक ही गठबंधन में रहना चाहिए।
खारिज करने का कोई आधार नहीं
दिनाकरन ने चयनात्मक राजनीतिक तर्क बताते हुए सवाल उठाया कि डीएमके-एआईएडीएमके के बीच समझौते की संभावना को खारिज करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि देश भर में राजनीतिक दलों ने बड़े राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बार-बार अपने पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ गठबंधन किया है।
राजनीतिक गठबंधन पर कोई आपत्ति नहीं
उन्होंने आगे कहा कि अगर चुनाव के दौरान एक-दूसरे के विरोधी रहे दलों के समर्थन से सरकार बनाना स्वीकार्य माना जाता है, तो किसी भी राजनीतिक गठबंधन पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए दिनाकरन ने कहा कि डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन की संभावना पर बहस करना बेमानी है, क्योंकि सरकारें उन दलों के समर्थन से भी बन सकती हैं जो पहले एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य की ओर इशारा करते हुए इस संभावना पर हो रही आलोचना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर टीवीके डीएमके गठबंधन में शामिल दलों के समर्थन से सरकार बना सकती है, तो डीएमके और एआईएडीएमके के एक साथ आने में क्या गलत है?