लखनऊ। उत्तर प्रदेश और हरियाणा को जोड़ने वाला पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का एक नया अध्याय लिख रहा है। लगभग 750 किलोमीटर लंबा यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पूर्वांचल से पश्चिमी भारत तक तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिसमें उत्तर प्रदेश के 22 जिलों को जोड़ा जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा इस परियोजना की तैयारी तेजी से चल रही है, जिसमें आधुनिक ड्रोन तकनीक का उपयोग करके टोपोग्राफी सर्वेक्षण किया जा रहा है। ड्रोन से हो रहा सटीक टोपोग्राफी सर्वेपानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट (मार्ग निर्धारण) के लिए ड्रोन से टोपोग्राफी सर्वेक्षण शुरू किया गया है। इस उन्नत तकनीक के माध्यम से एलाइनमेंट क्षेत्र में मौजूद मकान, नदियां, बिजली लाइनें, खेत, पेड़-पौधे और अन्य संरचनाओं का विस्तृत रिकॉर्ड एकत्र किया जा रहा है।
ड्रोन उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजरी और 3डी मैपिंग के जरिए जमीन की सटीक स्थिति कैप्चर करते हैं, जिससे पारंपरिक सर्वेक्षण की तुलना में समय और लागत में काफी बचत हो रही है। एनएचएआई के इंजीनियर अब अपने कार्यालय में बैठे-बैठे ही कंप्यूटर स्क्रीन पर देख सकते हैं कि प्रस्तावित मार्ग पर कहां कौन-सा निर्माण है, कहां नदी या पुल है, और कहां बिजली के खंभे या अन्य बाधाएं मौजूद हैं। यह डिजिटल ट्विन (डिजिटल प्रतिरूप) जैसी तकनीक परियोजना की योजना, डिजाइन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी व तेज बनाती है। इससे गलतियों की संभावना कम होती है और निर्णय लेना आसान हो जाता है।
परियोजना के लाभ और आगे की राह
यह एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर जैसे क्षेत्रों को हरियाणा के पानीपत (औद्योगिक केंद्र) से जोड़ेगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ड्रोन सर्वे के बाद भूमि अधिग्रहण और डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) की प्रक्रिया तेज होगी। यह परियोजना न केवल यात्रा समय घटाएगी बल्कि क्षेत्रीय विकास को नई गति देगी। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में एक मिसाल कायम कर रहा है, जो भविष्य की स्मार्ट रोड परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।