भोपाल के बाणगंगा चौराहे पर दर्दनाक सड़क हादसे में महिला डॉक्टर की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस स्कूल बस ने डॉक्टर को कुचला, उसमें हादसे के वक्त स्कूली बच्चे नहीं, बल्कि शादी के बाराती सवार थे। गिरफ्तार ड्राइवर के पास भारी वाहन चलाने का लाइसेंस भी नहीं है। उसने कबूला है कि बस को शादी में लाने-ले जाने के लिए किराए पर लिया गया था। हादसे के बाद चालक और सभी बाराती मौके से फरार हो गए थे। अब पुलिस इस मामले में बस मालिक और शिक्षा समिति की भूमिका की जांच कर रही है।
ड्राइवर पर गिरफ्तार, नहीं था हैवी व्हीकल लाइसेंस
पुलिस ने बस चालक विशाल बैरागी को दिल्लौद गांव से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि उसके पास हैवी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं है। वह केवल निजी कार चलाने का चालक है और शादी-ब्याह में बस किराए पर लेकर चला रहा था।
स्कूल बस में बैठे थे बाराती, बच्चे नहीं
ड्राइवर ने बताया कि रविवार रात वह करीब 30 बारातियों को लेकर कोलार गया था। सोमवार सुबह जब बस वापस बैरसिया लौट रही थी, तभी घाटी पर ब्रेक फेल हो गए और बस ने कई राहगीरों को कुचल दिया। इस हादसे में डॉक्टर आयशा की मौत हो गई थी।
हादसे के बाद भागा पैदल, गांव में छिपा बैठा था
बस डिवाइडर से टकराकर रुकी तो मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सभी बाराती मौके से भाग गए और ड्राइवर भी बस छोड़कर फरार हो गया। वह पैदल हलालपुरा बस स्टैंड पहुंचा और वहां से बस पकड़कर अपने गांव चला गया था।
शादी में ले जाने के लिए किराए पर ली गई थी स्कूल बस
पूछताछ में ड्राइवर ने बताया कि गांव के एक व्यक्ति प्रवेश नागर ने 15 हजार रुपए में यह बस शादी में ले जाने के लिए किराए पर ली थी। यह बस प्रदीप पांडे से खरीदी गई थी और श्री नंदा एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी के नाम रजिस्टर्ड थी, जिसे स्कूल बस के रूप में उपयोग किया जाना था।
ड्राइवर का मेडिकल परीक्षण, जांच जारी
पुलिस ने आरोपी का मेडिकल कराया है ताकि यह पता चल सके कि हादसे के समय वह नशे में था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ब्रेक फेल होना तकनीकी खामी थी या लापरवाही। पुलिस अब बस बेचने वाले समिति सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।