क्या आपने कभी सोचा है कि मध्य प्रदेश में ऐसा कौन-सा जिला है जिसे 'चूने का शहर' कहा जाता है? अगर नहीं जानते, तो आज हम आपको उस जिले की पहचान से रूबरू कराएंगे, जो प्रदेश की खनिज संपदा का एक चमकता हुआ सितारा है। इस जिले का नाम है कटनी, जिसे उसकी समृद्ध खनिज संपदा, विशेष रूप से चूना पत्थर और संगमरमर के लिए जाना जाता है। यहां की धरती से निकलने वाला पत्थर यहां के लोगों के लिए किसी हीरे से कम नहीं है। आइए, जानते हैं कटनी की वो बातें जो इसे खास बनाती हैं।
खनिज संपदा से भरपूर जिला
कटनी को 'लाइम सिटी' यानी 'चूने का शहर' का खिताब इसलिए मिला क्योंकि यहां चूना पत्थर का विशाल भंडार है। सीमेंट उद्योग में काम आने वाले इस खनिज की वजह से कटनी उद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा यहां बॉक्साइट, डोलोमाइट, फायरक्ले, लेटराइट और बार्टिजन भी बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
स्लीमनाबाद का संगमरमर और कटनी की पहचान
कटनी जिले के स्लीमनाबाद गांव की पहचान संगमरमर से जुड़ी है। यहां के संगमरमर की मांग देशभर में है और इसका बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होता है। यह खनिज संपदा जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है।
संस्कृति का अनोखा संगम
कटनी सिर्फ खनिजों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड की सांस्कृतिक छाप देखने को मिलती है, जो इसे विविधताओं से भरपूर बनाती है।
इतिहास और नाम का रहस्य
कटनी का नाम कटनी नदी से पड़ा है। इस शहर को पहले मुडवारा के नाम से जाना जाता था। अंग्रेजों के समय में इस क्षेत्र का विकास शुरू हुआ और 28 मई 1998 को इसे जिला घोषित किया गया।