Al-Falah University: फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कमरे नंबर-13 से बरामद एक डायरी ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती जांच में यह डायरी वही बताई जा रही है जो डॉ. मुजम्मिल और आरोपी उमर के बीच चली साजिश का पूरा चित्र उकेरती है। सूत्रों के अनुसार, डायरी और डिजिटल साक्ष्यों ने दर्शाया कि निशाना केवल दिल्ली नहीं, बल्कि देश के चार शहरों को एक साथ दहलाने का खौफनाक प्लान रचा गया था।
डायरी में क्या लिखा है
डायरी में पिछले दो वर्षों से चली आ रही गतिविधियों, बैठक-नोट्स और तय तारीखों का उल्लेख है। खास तौर पर 8 से 12 नवंबर के बीच की तारीखों का बार-बार हवाला है, जिस पर एजेंसियाँ सतर्क हो गईं। डायरी में चार अलग-अलग टीमों का जिक्र है — प्रत्येक टीम में दो-दो सदस्य, यानी कुल 8 संदिग्ध। सभी को IED (Improvised Explosive Devices) सौंपे जाने का उल्लेख भी दर्ज है।
यूनिवर्सिटी-लैब से केमिकल सप्लाई और हथियार व्यवस्था
जांच में पाया गया कि यूनिवर्सिटी की लैब से कुछ रसायन/केमिकल्स निकाले जा रहे थे। इन रसायनों को बाद में विस्फोटक तैयार करने में इस्तेमाल किये जाने का संकेत डायरी और अन्य सबूतों से मिला। आरोपियों में शाहीन और एक अन्य उमर नामक सदस्य के यूनिवर्सिटी-लैब से केमिकल उठाने और उन्हें धौज-तगा इलाकों के ठिकानों तक पहुँचाने का जिक्र है।
उमर का रूट-मैप भी मिला: कैसे पहुंचा दिल्ली तक
एजेंसियों को उमर का पूरा मूवमेंट-रूट भी मिला है। फरीदाबाद से फरार होकर मेवात होते हुए फिरोजपुर झिरका पहुँचा। वहां से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के ज़रिए दिल्ली की ओर बढ़ा; रास्ते में एक ढाबे पर रात रुका और कार में ही सो गया। एक्सप्रेसवे के CCTV में उसकी कुछ क्लिप्स भी कैद मिलीं। अंततः वह बदरपुर बॉर्डर के रास्ते दिल्ली में दाखिल हुआ तथा बाद में लाल-किला धमाके का आरोपी पाया गया।
सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर-17, कमरा नंबर-13 को सीज कर दिया गया है। NIA, जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस व दिल्ली पुलिस की टीमों ने मिलकर मामले की तफ़्तीश तेज कर दी है। बाकी 8 संदिग्धों की पहचान व गिरफ्तारी, केमिकल सप्लाई-चैन का पर्दाफाश, और अंतर-राष्ट्रीय कनेक्शनों की पड़ताल।
क्या था मकसद
एक साथ चार शहरों में तबाही फैलाना जांच सूत्रों के अनुसार, योजना यह थी कि चारों टीमें एक ही समय में अलग-अलग शहरों में विस्फोट कर सेना, नागरिक और आर्थिक हड़ताल दोनों को प्रभावित करें। एजेंसियों को शक है कि यदि समय रहते साजिश का पर्दाफाश न होता तो देश के कई हिस्सों में समानांतर तबाही हो सकती थी।
अब एजेंसियों की प्राथमिकता
1. कमरे-13 से मिले डायरी के डिजिटल और फिजिकल सबूतों का विस्तृत forensic विश्लेषण।
2. 8 संदिग्धों की फास्ट-ट्रैक पहचान और गिरफ्तारी।
3. केमिकल-स्रोत और सप्लाई-लिंक की कटिंग।
4. उमर-मुजम्मिल जैसे रणनीतिक साजिशकर्ताओं के नेटवर्क का निरीक्षण — स्थानीय व विदेशी कनेक्शन दोनों।
जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह खुलासा एक बड़े खतरे को समय रहते टालने वाला कदम साबित हुआ है।