
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में, 3 अक्टूबर 2025 को, एक युवा क्रिकेटर ने मैदान पर इतिहास रच दिया। ध्रुव जुरेल, ग्रेटर नोएडा के इस उभरते सितारे ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपने पहले ही टेस्ट मैच में शानदार शतक ठोका। 125 रनों की उस पारी ने न सिर्फ भारत को 286 रनों की भारी बढ़त दिलाई, बल्कि एक साधारण परिवार के लड़के की असाधारण कहानी को चमका दिया। यह शतक सिर्फ आंकड़ों का नहीं था – यह एक बेटे का अपने कारगिल वीर पिता को सलाम था, और भारतीय सेना को नमन। आइए, इस चमकते सितारे के सफर को जीवंत करें, जहां हर कदम पर संघर्ष था, लेकिन हार कभी नहीं मानी।
बचपन की कठिनाइयां: एक दुर्घटना और क्रिकेट का जुनून
ध्रुव का जन्म 21 जनवरी 2001 को उत्तर प्रदेश के आगरा में सैनिक परिवार में हुआ। उनके पिता, नेम सिंह जुरेल, भारतीय सेना के जाट रेजिमेंट में कारगिल युद्ध के वीर सिपाही थे। घर में अनुशासन और देशभक्ति की कहानियां गूंजती थीं। ध्रुव भी शुरू में सेना में भर्ती होने का सपना देखते थे – NDA का रास्ता अपनाना चाहते थे। लेकिन किस्मत ने कुछ और लिखा। मात्र पांच साल की उम्र में एक भयानक दुर्घटना ने उनका बायां पैर कुचल दिया, जब वे बस के नीचे आ गए। प्लास्टिक सर्जरी के बाद भी, दर्द और लंगड़ापन उनके साथ रहा। लेकिन यही दर्द ने उन्हें मजबूत बनाया।क्रिकेट का कीड़ा बचपन में ही काट चुका था।
आगरा के आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ते हुए, एक समर कैंप में उन्होंने बल्ला थामा। लेकिन घर की आर्थिक तंगी ने सपनों को परखा। पिता को क्रिकेट से चिढ़ थी वे चाहते थे कि बेटा सेना का रास्ता अपनाए। ध्रुव ने शुरू में खेल को छिपाया, लेकिन जुनून छिपा न रहा। मां ने अपनी सोने की चेन गिरवी रखकर पहला क्रिकेट किट खरीदा। यह बलिदान ध्रुव के दिल में हमेशा बसा रहा।
13 साल की उम्र में, वे अकेले आगरा से ग्रेटर नोएडा चले आए – एक दोस्त के बहाने, लेकिन बिना ठिकाने के।ग्रेटर नोएडा पहुंचकर, ध्रुव ने नोएडा में फूलचंद शर्मा की वंडर्स क्रिकेट क्लब के दरवाजे पर दस्तक दी। कोच फूलचंद याद करते हैं, "एक 13 साल का लड़का अकेला खड़ा था, बिना माता-पिता के। उसने कहा, 'सर, मुझे अपनी अकादमी में जगह दीजिए।'" ध्रुव ने रातें हॉस्टल में गुजारीं, दिन मैदान पर। शुरू में नोएडा और आगरा के बीच सफर कठिन था, लेकिन धीरे-धीरे मां भी नोएडा शिफ्ट हो गईं।
2015-17 तक वे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे, लेकिन 2017 में यूपीसीए के वैभव मेमोरियल टूर्नामेंट ने सब बदल दिया। वहां ध्रुव ने निचले क्रम में खेलते हुए रनों की बौछार की भीड़, स्लेजिंग, दबाव, सब कुछ झेला। यह उनकी पहली बड़ी जीत थी।
युवा स्तर पर चमक: कप्तानी से IPL तक
ग्रेटर नोएडा की मिट्टी ने ध्रुव को पक्का बनाया। आगरा के स्प्रिंगडेल क्रिकेट अकादमी और नोएडा एक्सटेंशन के एस्टर क्रिकेट अकादमी में कोचिंग लेते हुए, वे तेजी से ऊपर चढ़े। 2019 में अंडर-19 एशिया कप में उन्होंने भारत को कप्तानी करते हुए खिताब दिलाया। 2020 के अंडर-19 विश्व कप में वे उप-कप्तान बने दक्षिण अफ्रीका में खेलते हुए टीम को क्वार्टरफाइनल तक पहुंचाया।घरेलू क्रिकेट में धमाल मचा। 2022 में यूपी के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। सिर्फ छठे फर्स्ट-क्लास मैच में नागालैंड के खिलाफ 249 रन ठोके – ओपनिंग करते हुए! यह पारी ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। उसी साल IPL 2022 के लिए राजस्थान रॉयल्स ने 20 लाख में खरीदा, लेकिन मौका नहीं मिला। धैर्य रखा।
2023 में IPL डेब्यू –
पंजाब किंग्स के खिलाफ 32*(15) – इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में। फिर 2024 IPL में फिनिशर की भूमिका निभाई। रॉयल्स ने उन्हें 14 करोड़ में रिटेन किया।टेस्ट क्रिकेट का सपना 2024 में पूरा हुआ। इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में डेब्यू 46 रन। रांची में दूसरा टेस्ट: 90 और 39* – प्लेयर ऑफ द मैच! जिम्बाब्वे में T20I डेब्यू भी। ध्रुव विकेटकीपिंग में तेज, बल्लेबाजी में संयमित – स्क्वायर ऑफ विकेट पर उनकी कट शॉट्स चमत्कारिक। जो रूट जैसे दिग्गजों से सीखा: "हर रोज वही काम करो, नतीजे खुद आएंगे।"
शतक का जादू:
अहमदाबाद में सलामी 2025 का वेस्ट इंडीज दौरा ध्रुव के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। ऋषभ पंत की चोट ने उन्हें मौका दिया। पहले टेस्ट के दूसरे दिन, शुभमन गिल के आउट होने पर ध्रुव क्रीज पर उतरे। 190 गेंदों पर 125 रन – 15 चौके, 3 छक्के। रविंद्र जडेजा के साथ 206 रनों की साझेदारी, केएल राहुल के शतक के बाद। वेस्टइंडीज के स्पिनरों को रोका, नई गेंद का सामना किया। शतक पूरा होते ही 'गन सल्यूट' – बैट को बंदूक की तरह उठाकर।यह जश्न भावुक था। पचास पर मुट्ठी तानकर पिता को सलाम, शतक पर सेना को। "मेरे पिता कारगिल के वीर हैं। हम मैदान पर खेलते हैं, वे रण में लड़ते हैं। यह शतक उनका और सेना का है," ध्रुव ने कहा। पिता नेम सिंह भावुक हो गए: "आज उसने पूरे भारत को गौरवान्वित किया।" यह भारत का 12वां विकेटकीपर शतक था, और वेस्टइंडीज के खिलाफ पांचवां मेडन टेस्ट टॉन।
चमकते सितारे का भविष्य:
प्रेरणा की किरण ध्रुव जुरेल की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं – यह संघर्ष, बलिदान और सम्मान की है। ग्रेटर नोएडा की धूल भरी पिचों से अहमदाबाद के स्टेडियम तक, उन्होंने साबित किया कि सपने देखने वाले कभी हारते नहीं। आज वे न सिर्फ बल्लेबाज हैं, बल्कि फिनिशर, कीपर, और प्रेरणा स्रोत। राहुल और जडेजा जैसे सीनियर्स की तारीफ: "ध्रुव का संयम कमाल का है।" IPL 2025 में रॉयल्स के लिए, और टेस्ट में पंत की छाया से बाहर – ध्रुव का सफर अभी शुरू हुआ है।जैसे आकाश में एक नया तारा चमका है, वैसे ही ध्रुव जुरेल भारतीय क्रिकेट के आकाश में अपनी रोशनी बिखेर रहे हैं। यह कहानी हर उस युवा को कहती है: संघर्ष करो, सलाम करो, और चमको