Supreme Court has ordered: अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें Pema Khandu के परिवार से जुड़ी फर्मों को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इस मामले में Supreme Court of India ने सख्त रुख अपनाते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) को प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया है। यह फैसला राज्य में सार्वजनिक निर्माण कार्यों के आवंटन को लेकर पारदर्शिता पर उठे सवालों के बीच आया है।
फैसलों की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सीबीआई नवंबर 2015 से 2025 तक लिए गए फैसलों और उनके क्रियान्वयन की जांच करे। इस दौरान विशेष रूप से उन ठेकों की पड़ताल की जाएगी, जो प्रतिवादी 4 से 6 से जुड़ी संस्थाओं को दिए गए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर इस समयावधि से बाहर के मामलों की जांच करने पर कोई रोक नहीं है।
राज्य सरकार को दिए गए स्पष्ट निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे सीबीआई के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें, जो जांच एजेंसी को समय पर सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराए। इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित की जा सकेगी।
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16 हफ्तों में पेश होगी स्थिति रिपोर्ट
सीबीआई को आदेश दिया गया है कि वह 16 सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करे। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि मामले में आगे स्वतंत्र और विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं। इस फैसले को Justice Vikram Nath की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सुनाया।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अरुणाचल प्रदेश में कई विकास परियोजनाओं के ठेके मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए। इस पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है।