सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीआरटी) की क्लास आठ की उन बुक्स पर पूर्ण बैन लगा दिया जिसमें जुडिशियरी में करप्शन पर एक चैप्टर शामिल है।न्यायपालिका की छवि पर कथित रूप से सवाल उठाने वाली किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार देते हुए किताब को बाजार से तत्काल वापस लेने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
कड़ी आपत्ति जताई
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कराएगी। एक दिन पहले ही कोर्ट ने किताब के एक विशेष अध्याय पर कड़ी आपत्ति जताई थी और स्पष्ट किया था कि न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट की आपत्ति के बाद एनसीईआरटी ने संबंधित अध्याय को दोबारा लिखने का फैसला किया है।सुप्रीम कोर्ट में एनसीईआरटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुओ मोटू मामले में माफी मांगी। इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि भेजे गए नोटिस में माफी का कोई उल्लेख नहीं था। उन्होंने कहा कि यह संस्थागत जिम्मेदारी है कि पता लगाया जाए कि यह सामग्री प्रकाशित कैसे हुई और किसके स्तर पर चूक हुई।
विवादित अध्याय
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि विवादित अध्याय तैयार करने वाले दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और वे भविष्य में यूजीसी या किसी मंत्रालय के साथ काम नहीं कर सकेंगे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि केवल दो लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। “यह बहुत आसान होगा और वे बच निकलेंगे। न्यायपालिका पर प्रहार हुआ है,” पीठ ने सख्त टिप्पणी की।कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या किताब की प्रतियां अब भी बाजार या ऑनलाइन उपलब्ध हैं। बताया गया कि बाजार में गई 32 प्रतियां वापस ले ली गई हैं और पूरी पुस्तक की समीक्षा की जाएगी।
भ्रष्टाचार जैसे विषय पढ़ाना गंभीर चिंता
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी चिंता जताई। सिब्बल ने कहा कि कक्षा 8 के छात्रों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार जैसे विषय पढ़ाना गंभीर चिंता का विषय है।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन व स्वायत्तता सुनिश्चित की है। यदि युवाओं के मन में संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा हुआ तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
व्यापक जांच
अदालत ने दोहराया कि मामले की व्यापक जांच होगी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही आश्वासन लिया गया कि विवादित अध्याय हटाकर संशोधित संस्करण पुनः प्रकाशित किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायपालिका की साख से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।