UGC Act 2026: सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के 23 जनवरी को जारी किए गए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने' वाले नियमों पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच में मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि यूजीसी के नए नियम स्पष्ट नहीं हैं और इसके गलत इस्तेमाल होने की संभावना है। बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इन गाइडलाइंस को दोबारा तैयार कर नियमों को ज्यादा पारदर्शी और सहज बनाए। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है।
यूजीसी का नया 'कानून' क्या था?
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 लागू किया। इसे 'इक्विटी एक्ट 2026' भी कहा जा रहा है। इनका उद्देश्य था-कैंपसों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना और छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ के लिए एक सुरक्षित व सम्मानजनक माहौल बनाना।
नए नियमों में क्या था बदलाव
हर संस्थान में एक इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाया जाएगा, जो भेदभाव की शिकायतों को संभालेगा और कमजोर वर्ग का सपोर्ट करेगा। इसके साथ 24×7 शिकायत तंत्र, ऑनलाइन पोर्टल और सख्त टाइमलाइन को भी अनिवार्य किया गया है। जैसे शिकायत मिलते ही 24 घंटे में बैठक, 15 दिन में जांच रिपोर्ट और सात दिनों के भीतर कार्रवाई, ताकि शेड्यूल कास्ट (SC), शेड्यूल ट्राइब (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके। यदि संस्थान नियम नहीं मानते, तो यूजीसी फंडिंग रोक सकता है।
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क्या था 2012 का नियम?
यूजीसी के पुराने नियम का नाम 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूंस, रेगुलेशंस 2012' था। यह यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में भेदभाव को रोकने के लिए पहला ऑफिशियल रूल था। 2012 की गाइडलाइंस में कई प्रावधान थे, लेकिन उनमें OBC को शामिल नहीं किया गया था। इस बार, OBC को शामिल किया गया है, जिससे ये नियम और भी ज्यादा विवादित हो गए हैं। शिक्षा मंत्रालय के डेटा के अनुसार, OBC, SC और ST छात्र मिलकर अब कुल एनरोलमेंट का 61% हैं।
कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ये नियम पहली नजर में स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। SC ने केंद्र सरकार से नियमों को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि 'हम जनरल कैटेगरी की शिकायतों पर विचार नहीं कर रहे हैं। हमारी चिंता यह है कि आरक्षित समुदाय के सदस्यों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली लागू रहनी चाहिए।'