Delhi Riots: दिल्ली दंगा मामले में आरोपी शरजील इमाम और अन्य छह आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने इन याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए अदालत में कई अहम तथ्य और वीडियो क्लिप पेश किए। पुलिस की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि आरोपी नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध की आड़ में हिंसा फैलाने की साजिश रच रहे थे। उन्होंने कहा कि यह विरोध साधारण प्रदर्शन नहीं था, बल्कि सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया एक संगठित प्रयास था।
ट्रंप के दौरे की टाइमिंग को बताया सोची-समझी योजना
ASG राजू ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली दंगों की टाइमिंग संयोग नहीं थी, बल्कि पूरी तरह रणनीतिक रूप से चुनी गई। उन्होंने कहा कि हिंसा की योजना उस समय बनाई गई जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दौरे पर थे, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचे। राजू ने कहा कि आरोपी लोगों को भड़काने के लिए बाबरी मस्जिद, कश्मीर और तीन तलाक जैसे संवेदनशील मुद्दों का जिक्र करते थे। अदालत में प्रस्तुत वीडियो क्लिप में शरजील के कथनों को दिखाया गया जिसमें वह “हिंसक विरोध” और “असम को भारत से अलग करने” की बातें करता दिख रहा है। कोर्ट ने इस पर सवाल किया कि क्या पुलिस यह कह रही है कि आरोपी लोगों को उकसाता था, जिस पर ASG ने हां में जवाब दिया।
आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई रोकने की भी थी योजना
राजू ने आगे कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा पर हमला करने की सोची-समझी कोशिश थी। उन्होंने बताया कि आरोपियों की मंशा दिल्ली की आवश्यक सप्लाई रोकने की थी ताकि राजधानी और पूर्वोत्तर दोनों पर असर पड़े। उन्होंने 'चिकन नेक'—16 किलोमीटर लंबी उस भूमि का जिक्र किया जो असम को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ती है—यह दिखाने के लिए कि उद्देश्य देश की आर्थिक धमनियों पर प्रहार करना था। पुलिस ने कहा कि आरोपी मुसलमानों को भड़काने, संस्थाओं को बदनाम करने और हिंसा फैलाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई जारी रखेगा।