लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। लाभार्थियों की पहचान से लेकर राशन दुकानों के स्टॉक और वितरण तक की जानकारी ऑनलाइन दर्ज होने से पूरी व्यवस्था की निगरानी आसान हुई है। इससे अनियमितताओं पर अंकुश लगाने और पात्र परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने में मदद मिल रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 93.5 प्रतिशत राशन कार्डों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। इसके जरिए कार्डधारकों के विवरण को अद्यतन करने के साथ वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है। ई-केवाईसी से रिकॉर्ड में दर्ज लोगों की जानकारी अधिक विश्वसनीय बनाने में भी मदद मिल रही है।
पीडीएस में आधार फीडिंग का स्तर 99.99 प्रतिशत और आधार प्रमाणीकरण 99.98 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आधार आधारित पहचान से राशन लेने वाले व्यक्ति का सत्यापन मजबूत हुआ है। वहीं, दुकानों पर उपलब्ध खाद्यान्न का स्टॉक और वितरण संबंधी विवरण ऑनलाइन दर्ज होने से विभागीय अधिकारियों को किसी भी स्तर पर स्थिति की जानकारी मिल सकती है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड, आधार प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना है। इससे काल्पनिक लाभार्थियों और वितरण में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी तथा पात्र परिवारों को उनके हिस्से का खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था और मजबूत होगी।