लखनऊ। उत्तर प्रदेश की जहरीली हवा को साफ करने के लिए विश्व बैंक ने बडा कदम उठाया है। विश्व बैंक के बोर्ड ने दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। एक उत्तर प्रदेश और दूसरा हरियाणा के लिए। इनमें से उत्तर प्रदेश के लिए 299.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर लगभग 2500-2510 करोड़ रुपये का लोन मंजूर हुआ है। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट से अलग से 1119 करोड़ रुपये का ग्रांट भी मिलेगा। इस तरह कुल 2700 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि 2025 से 2030 तक चरणबद्ध तरीके से खर्च की जाएगी।
एयरशेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट
यह देश का पहला एयरशेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट होगा, यानी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि पूरे वायु-क्षेत्र (जैसे कानपुर-लखनऊ-वाराणसी का पूरा कोरिडोर) को एक यूनिट मानकर प्रदूषण कम किया जाएगा। योजना में 39 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त या भारी सब्सिडी पर एलपीजी / पीएनजी कनेक्शन
ग्रामीण इलाकों में बायोगैस और इंडक्शन चूल्हे भी बांटे जाएंगे। योजना का उद्देश्य लकड़ी-कोयला-गोबर के चूल्हों से निकलने वाला धुआं 70-80 परसेंट तक कम करना है। इस परियोजना के तहत पुराने प्रदूषक वाहनों की छुट्टी की जाएगी। 13,500 से ज्यादा पुराने डीजल ट्रक और बसों को स्क्रैप करके नए सीएनजी /इलेक्ट्रिक वाहन दिए जाएंगे। ट्रांसपोर्टरों को 30-40 परसेंट तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही पराली जलाने पर लगाम लगाया जाएगा। 50,000 से ज्यादा किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर स्टॉ रीपर जैसी मशीनें सब्सिडी पर दी जाएंगी।
इंडस्ट्री में क्लीन टेक्नोलॉजी आगरा के जूते, फिरोजाबाद की चूड़ियां, भदोही की कारपेट, मुरादाबाद की पीतल इंडस्ट्री में जिग-जैग भट्ठे, स्क्रबर, इलेक्ट्रिक फर्नेस लगाए जाएंगे। 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी फैक्टरियों को अपग्रेड किया जाएगा। अभी 25 शहरों में मॉनिटरिंग स्टेशन हैं, 2029 तक 80 शहरों में 200 से ज्यादा नए स्टेशन खोले जाएंगे। इतनी बडी मदद के पीछे उत्तर प्रदेश भारत का नंबर-1 प्रदूषित राज्य का होना एक प्रमुख कारण है। दूसरे कानपुर लगातार दुनिया के टॉप-5 सबसे प्रदूषित शहरों में रहता है। राज्य में हर साल वायु प्रदूषण से करीब 2.5 लाख लोग समय से पहले मर जाते हैं। सर्दियों में एक्यूआई 500-600 तक पहुंच जाता है।
विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्ते तानो कुमे ने कहा, यह सिर्फ उत्तर प्रदेश का नहीं, पूरे दक्षिण एशिया का सबसे महत्वाकांक्षी क्लीन एयर प्रोग्राम है। अगर यह सफल रहा तो बंगाल, बिहार, पंजाब सबके लिए मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री खुद हर महीने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे। पहला बड़ा टेंडर जनवरी 2026 में निकलेगा। बैंक का लोन 10 साल का है, जिसमें 2 साल की ग्रेस पीरियड भी है।अब सवाल सिर्फ एक है, कागजी मंजूरी के बाद जमीन पर काम कितनी तेजी से और कितनी पारदर्शिता से होगा?