शाहजहांपुर। देशभर में होली का पर्व मनाने की अलग-अलग परंपराएं हैं। कहीं फूलों से होली खेली जाती है, तो कहीं लठ्ठमार होली होती है, लेकिन शाहजहांपुर की होली विश्व की सबसे अनोखी होली है यहां जूतेमार होली खेली जाती है। यहां एक शख्स को अंग्रेज अफसर बनाकर भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है और उसे लॉट साहब का नाम देकर उसे जूतों को माला पहनाई जाती है और रस्ते भर जुलूस में शामिल लोग उस पर जूते चप्पलों की बौछार करते हैं।
इसके साथ जो लोग लॉट साहब के साथ भैसा गाड़ी पर सवार होते हैं, वह रास्ते भर लाट साहब पर झाड़ू और जूते बरसाते रहते हैं.लॉट साहब का ये जुलूस होली के दिन 4 मार्च को निकलेगा. परंपरा के अनुसार ये जुलूस सुबह 9 बजे निकलेगा और 12 बजे संपन्न होगी।
बताते हैं कि यह परंपरा तकरीबन 300 वर्ष पुरानी है। यहां के लोग अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों पर अपना आक्रोश लॉट साहब के जुलूस के रूप में निकलते हैं। इस जूतेमार होली के लिए शाहजहांपुर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। इसमें लॉट साहब का जुलूस चौक क्षेत्र स्थित फूलमती मंदिर से लाट साहब को मत्था टेकने के बाद शुरू होकर चौक कोतवाली आता है, जहां पर तैनात कोतवाल लाट साहब को सलामी देने के साथ इनाम भी देते है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह अनोखी परंपरा, अंग्रेजी शासन के दौरान गवर्नर जरनल को लॉट साहब के नाम से खिताब दिया जाता था और अब यह जुलूस अंग्रेज शासकों के जुल्म-ज्यादती के खिलाफ आक्रोश के प्रतीक के तौर पर हर साल शाहजहांपुर में निकाला जाता है।
जुलूस में लॉट साहब को बैलगाड़ी पर तख्त डाल कर बिठाया जाता है और सिर पर हेलमेट भी पहनाया जाता है, ताकि चोट न लगे। इसके साथ ही उनके ऊपर झाड़ू से हवा भी की जाती है और होरियारे लोग लाट साब की जय बोलते हुए उन्हें जूते मारते हैं। इसके बाद जुलूस शहर के कई मार्गों से गुजरता हुआ जुलूस घंटा-घर पहुंचता है और वहां से दोबारा चौक क्षेत्र में जाकर सम्पन्न हो जाता है।
शहर में निकलता है दो जगहों से लॉट साहब का जुलूस
शाहजहांपुर में दो जगह लॉट साहब का जुलूस निकलता है। पहला चौक कोतवाली क्षेत्र से दूसरा थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र से। दोनों जुलूसों हुड़दंगियों के कारण पुलिस विभाग काफी सक्रिय रहता है।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की व्यापक स्तर पर ड्यूटी लगाई जाती है। जनपद के अधिकारियों की छुट्टी निरस्त कर दी जाती है। कई जगह सेक्टर मैजिस्ट्रेट के रूप में जनपद के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती है।
जुलूस के मार्ग में पड़ने वाले धार्मिक स्थलों को तिरपाल से ढक दिया जाता है। जुलूस मार्ग न बदले इस कारण व्यापक स्तर पर बैरिकेडिंग कराई जाती है। जनपद के अलावा कई जनपदों से फोर्स के साथ पैरामिलेट्री बुलाकर तैनात की जाती है। पिछले साल से अधिक पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है।
जिले में गत वर्ष जुलूस के दौरान विवाद भी हुआ था। ऐसे में बड़े लॉट साहब के जुलूस के लिए इस बार फोर्स भी ज्यादा मांगी गई। गत वर्ष 26 इंस्पेक्टर दूसरे जिलों से आए थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़ाकर 30 कर दी गई. गत वर्ष 130 उपनिरीक्षक बाहर से आए थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़ाकर 150 पहुंच गई।