
छठ पूजा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और आस्था से मनाया जाने वाला पर्व है। इस महापर्व में छठी मैया और भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। छठ पूजा में व्रती कठिन नियमों और व्रतों का पालन करते हैं, जिनमें शुद्धता, संयम और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर छठी मैया को अर्पित किए जाने वाले प्रसादों में ठेकुआ का एक विशेष स्थान है। यह न सिर्फ पूजा का एक अभिन्न अंग है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और परिवार के जुड़ाव का भी प्रतीक माना जाता है।
ठेकुआ का धार्मिक महत्व
ठेकुआ को छठी मैया का प्रिय प्रसाद माना जाता है। यह प्रसाद पूरी तरह से सात्विक होता है – इसमें न तो लहसुन-प्याज होता है, न ही किसी तरह का रसायन। इसके पीछे मान्यता है कि ठेकुआ जितना मीठा और सरल होता है, उतनी ही सरल और निश्छल भावना से यह पूजा अर्पित की जाती है। घर की महिलाएं इसे पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ बनाती हैं और बांस की डलिया में सजा कर अर्घ्य के समय सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित करती हैं।
ठेकुआ बनाने की विधि
सामग्री:
गेहूं का आटा – 2 कप
गुड़ – 1 कप (कद्दूकस किया हुआ या पिघला हुआ)
सौंफ – 1 छोटा चम्मच
नारियल का बुरादा (वैकल्पिक)
इलायची पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच
घी – 2 बड़े चम्मच (मोयन के लिए)
पानी – जरूरत अनुसार
तेल या घी – तलने के लिए
विधि:
सबसे पहले गुड़ को पानी में घोलकर छान लें ताकि उसमें कोई अशुद्धि न रहे।
एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें, उसमें घी (मोयन), सौंफ, इलायची और नारियल डालें।
अब धीरे-धीरे गुड़ का पानी डालते हुए आटा गूंद लें। ध्यान रहे कि आटा न ज्यादा सख्त हो, न बहुत नरम।
आटे को 15-20 मिनट ढककर रख दें।
अब उसकी लोइयां बनाकर ठेकुआ के सांचे या हाथ से डिजाइन दें।
कढ़ाई में तेल या घी गरम करें और मध्यम आंच पर ठेकुआ को सुनहरा होने तक तलें।