बिहार की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जेडीयू के नेताओं के हालिया बयानों में अलग-अलग रुख दिखाई दे रहा है। एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने की बात कही है, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पार्टी पहले प्रस्तावित कानून के प्रावधानों का अध्ययन करेगी और उसके बाद अपना रुख तय करेगी। ऐसे में जेडीयू की अंतिम स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं बढ़ गई हैं।
श्याम रजक बोले- बिहार में लागू नहीं होगा यूसीसी
जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने यूसीसी को लेकर पार्टी की पुरानी स्थिति का हवाला दिया। उनका कहना है कि जेडीयू बिहार में समान नागरिक संहिता लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता नीतीश कुमार पहले ही इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। रजक के बयान के मुताबिक, संसद में किसी विधेयक का समर्थन करने और किसी राज्य में उसके लागू होने के सवाल को अलग-अलग तरीके से देखा जा सकता है।
विजय चौधरी ने कहा- पहले प्रावधान देखेंगे
दूसरी ओर, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने यूसीसी को लेकर ज्यादा सावधानी वाला रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि अभी प्रस्तावित कानून के प्रावधान सामने नहीं आए हैं। इसलिए जेडीयू पहले उसके प्रावधानों का अध्ययन करेगी और उसके बाद पार्टी के भीतर चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रावधान उचित होंगे तो पार्टी बिना वजह उनका विरोध नहीं करेगी।
जेडीयू की बैठक पर टिकी निगाहें
यूसीसी को लेकर जेडीयू की एक अहम बैठक भी चर्चा में है, जिसमें पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के शामिल होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि बैठक में यूसीसी सहित मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करने की भी जानकारी सामने आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में जेडीयू अपना रुख और स्पष्ट कर सकती है।
पुरानी चिट्ठी से फिर गरमाया मामला
यूसीसी की मौजूदा बहस के बीच नीतीश कुमार की 2017 की पुरानी चिट्ठी का भी जिक्र हो रहा है। उस समय नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने विधि आयोग के सामने समान नागरिक संहिता को लेकर अपनी राय रखी थी। विधि आयोग के रिकॉर्ड में भी उस दौर में यूसीसी पर व्यापक परामर्श की प्रक्रिया दर्ज है। अब पुराने रुख और जेडीयू नेताओं के ताजा बयानों को लेकर पार्टी की अंतिम रणनीति पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।