अक्सर घर में कोई बड़ा आए तो उसके पैर छूने का रिवाज सनातन धर्म है. लेकिन आपको बता दें ये कोई परम्परा नहीं है, बल्कि उसके पीछे गहरा विज्ञान छिपा है. यदि आप इसे जान लेंगे तो फिर बड़ों के पैर छूना कभी नहीं भूलेंगे.. कहने के लिए पैरे छूना विनम्रता का प्रतीक है, लेकिन यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कारों और आशीर्वाद को भी सुनिश्चित करती है. आइये जानते हैं पैर छूने के पीछे के वैज्ञानिक कारण क्या हैं. साथ ही पैर छूने के लिए कितना झुकना चाहिए अथवा नहीं?
क्या कहते हैं शास्त्र
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र और गरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि जब कोई श्रद्धापूर्वक किसी ज्ञानी या वृद्ध के चरण स्पर्श करता है, तो उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह ऊर्जा उसके चित्त को शांत करती है और उसकी आत्मा को सात्विक बनाती है. वहीं मनुस्मृति में कहा गया है कि गुरुजन या वृद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करने से पापों का अंत हो जाता है..
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वहीं चेतना जागरण में कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति श्रद्धा से चरण स्पर्श करता है, तो उसकी मस्तिष्कीय तरंगें (Brain Waves) गुरू की ऊर्जा से टकराती हैं और जिससे चित्त की जागरूकता बढ़ती है. यह क्रिया आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खोलती है. उपनिषदों की मानें तो चरण स्पर्श वास्तव में आत्मा का आत्मा के समक्ष समर्पण है. यह क्रिया व्यक्ति को गुरु तत्व से जोड़ती है, जो मोक्ष मार्ग में प्रवेश की कुंजी है.