उत्तर प्रदेश BJP अध्यक्ष चयन को लेकर पार्टी के अंदर दो राय की स्थित दिख रही हैं. एक गुट चाहता है कि नया प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले ही चुन लिया जाए, जिससे संगठन में रफ्तार बनी रहे. जबकि दूसरा गुट मानता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही प्रदेश स्तर पर चयन करना उचित रहेगा, ताकि संगठनात्मक स्थिरता और रणनीतिक तालमेल बना रहे. इस बीच BJP के अपने रूल्स के अनुसार सबसे पहले अधिकांश राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव संभव होता है. अब तक 12 राज्यों में चयन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. जबकि यूपी, गुजरात, कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों की बारी बाकी है. प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया में लगभग चार दिन का समय लगेगा. जिसमें मतदाता सूची जारी करना, नामांकन, आपत्ति निपटान, और पर्यवेक्षक द्वारा घोषणा शामिल है.
जिन राज्यों में चयन पहले किया जाता है, उनके संगठनात्मक दायरे तैयार हो जाएंगे, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव में देरी हो सकती है. वहीं अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष पहले चुना गया तो प्रदेश स्तर पर चुस्ती के साथ नियुक्ति संभव होगी, लेकिन संगठनात्मक तालमेल में ढीलापन हो सकता है.
आलाकमान का फैसला अंतिम
भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व यानी पीएम मोदी, अमित शाह और RSS इस निर्णय पर अंतिम अधिकार रखेंगे. अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव जुलाई अंतिम सप्ताह या अगस्त की शुरुआत में होता है, तो यूपी में प्रदेश अध्यक्ष चयन की प्रक्रिया उसी के बाद तेज़ी से शुरू हो सकती है.
इस पूरे परिदृश्य में एक बड़ी अनिश्चितता यह है कि क्या चयन सिर्फ संगठन तक सीमित रहेगा, या इसमें सरकार के भीतर भी फेरबदल (जैसे कैबिनेट पुनर्गठन) शामिल होगा. और सवाल यह भी है कि यूपी में अगला अध्यक्ष किस समुदाय से होगा OBC, दलित या फिर कोई अन्य. क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों में वोटों में मिली गिरावट (यूपी में सीटें 62 से घटकर 33 पर) भाजपा के लिए समीकरणों को फिर से सेट करने की चुनौती लेकर आई है.
क्या कहते हैं कार्यकर्ता?
कुछ नेताओं का कहना है कि नया प्रदेश अध्यक्ष पहले चुना जाना चाहिए ताकि संगठन की गति बनी रहे, जबकि कुछ अन्य नेताओं का सुझाव है कि यहीं चयन तब किया जाए जब राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न हो जाए ताकि संगठनात्मक व्यवस्था और रणनीतिक तालमेल एक साथ मज़बूत हों.
कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव पहले हो गया, तो आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों में समय नहीं बर्बाद होगा. दूसरी तरफ़, अन्य नेता सोचते हैं कि इस प्रक्रिया के साथ योगी सरकार में संभावित फेरबदल भी जुड़ा हो सकता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के बाद ही करना उचित रहेगा.
एक वरिष्ठ BJP नेता ने बताया कि यूपी अध्यक्ष चुनने में समय की कमी है. उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में कम‑से‑कम चार दिन लगेंगे. पहले आपत्तियों के बाद मतदाता सूची प्रकाशित करनी होगी, जिसे पूरा करने में दो दिन लगते हैं. सूची प्रकाशित होने के बाद नामांकन शुरू होगा और एक दिन बाद पर्यवेक्षक नए अध्यक्ष की घोषणा करेंगे. इससे पहले चयन की तारीख घोषित की जाएगी और फिर ऑफिस में सूची चस्पा की जाएगी. दूसरी ओर एक BJP कार्यकर्ता ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए अभी वक़्त है. संसद का मानसून सत्र दो सप्ताह बाद शुरू हो रहा है और पार्टी ने इसी समय सीमा को राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन के लिए निर्धारित किया है.
कैसे होगी वोटिंग?
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में वोटिंग की प्रक्रिया के बारे में जान लेते हैं. इसके अंतर्गत हर विधानसभा क्षेत्र से एक-एक सदस्य चुना जाता है. जिन्हें “प्रांतीय पार्षद” कहा जाता है और ये सभी चुनाव जिला भाजपा अध्यक्षों के साथ मिलकर होते हैं. अब तक 70 संगठनात्मक जिलों से प्रांतीय पार्षदों का चयन हो चुका है और इनकी कुल संख्या लगभग 300 से अधिक होगी. इसके साथ ही मौजूदा विधायकों और सांसदों में से 20 % सदस्य भी इस चुनाव में वोट डालेंगे. जिला अध्यक्ष तो वोटिंग स्थल पर मौजूद रहेंगे, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होगा. यह चुनाव अधिकतर संगठनात्मक प्रतिनिधियों और सांसद-विधायकों तक सीमित रहता है, जिससे प्रक्रिया में संख्यात्मक रूप से स्पष्ट और संतुलित निर्णय सुनिश्चित होता है.