लखनऊ। विधानसभा में बुधवार को सदन की कार्यवाही का बड़ा हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विवादास्पद मुद्दों पर केंद्रित रहा। किसानों और विधवाओं (महिलाओं/विधवाओं) को मुफ्त बिजली प्रदान करने की मांग को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जबकि सत्ता पक्ष ने मौजूदा योजनाओं का बचाव करते हुए विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान यह चर्चा छिड़ी, जिससे कार्यवाही कई बार स्थगित होनी पड़ी।सपा के अखिलेश यादव और एके शर्मा ने मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। यादव ने कहा कि सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली की घोषणा की थी, लेकिन लाखों किसान अभी भी इससे वंचित हैं। उन्होंने पूछा, किसानों को मुफ्त बिजली देने का वादा अधूरा क्यों है? क्या बकाया बिलों के कारण 5 लाख से अधिक किसान योजना से बाहर हैं? साथ ही उन्होंने विधवाओं और गरीब महिलाओं के लिए अलग से मुफ्त बिजली की मांग की, ताकि घरेलू उपभोग में राहत मिले।
एके शर्मा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सपा शासन में महिलाएं बिजली के तारों पर कपड़े सुखाती थीं, लेकिन अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती और ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर की समस्या बनी हुई है। सपा सदस्य ने ऊर्जा मंत्री से पूछा, विधवाओं को मुफ्त बिजली क्यों नहीं दी जा रही? क्या यह चुनावी वादा मात्र है? विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी सवाल दागे। सपा विधायकों ने आरोप लगाया कि मुफ्त बिजली योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया जटिल है और बकाया बिल माफ न होने से गरीब किसान प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने विधवाओं के लिए विशेष कोटे की मांग की, क्योंकि वे अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर होती हैं और घरेलू बिजली बिल उनका बड़ा बोझ बन जाता है। जवाब में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगाए जा रहे हैं और 16 लाख से अधिक ट्यूबवेलों को मुफ्त बिजली मिल रही है। निजी नलकूप कनेक्शनधारकों के लिए 1 अप्रैल 2023 से मुफ्त विद्युत आपूर्ति लागू है, जिसमें अब तक 10.58 लाख किसान पंजीकृत हैं। बकाया बिल क्लियर करने की शर्त पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा, योजना का लाभ लेने के लिए बकाया चुकाना जरूरी है, ताकि बिजली वितरण कंपनियां घाटे में न जाएं।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सपा के समय बिजली की स्थिति बदतर थी, अब हर गांव में 24 घंटे बिजली पहुंच रही है।विधवाओं और महिलाओं के मुद्दे पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले से सब्सिडी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन पूर्ण मुफ्त बिजली का विस्तार वित्तीय बोझ बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, सरकार गरीब महिलाओं और विधवाओं के लिए अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस कर रही है, जैसे उज्ज्वला और आयुष्मान भारत। मुफ्त बिजली का वादा किसानों के सिंचाई पर केंद्रित है।
चर्चा के दौरान हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने सदन को कुछ देर के लिए स्थगित किया। विपक्ष ने वॉकआउट की धमकी भी दी, लेकिन अंततः चर्चा जारी रही। ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर और बिजली कटौती के सवालों पर भी बहस हुई, जहां विपक्ष ने ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या बताई, जबकि सरकार ने ट्रांसफॉर्मर अपग्रेडेशन के आंकड़े पेश किए। यह मुद्दा बजट सत्र के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल के बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 65,926 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें किसानों की मुफ्त बिजली सब्सिडी शामिल है। विपक्ष का कहना है कि घोषणाएं कागजी हैं, जबकि सत्ता पक्ष उपलब्धियों का दावा कर रहा है।