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Entertainment News : भारतीय पौराणिक कथाओं में रावण एक ऐसा किरदार है जो जितना विरोधी है, उतना ही प्रभावशाली भी. रावण केवल एक राक्षस राजा नहीं, बल्कि विद्वता, शक्ति और घमंड का प्रतीक रहा है। यही वजह है कि जब भी इस किरदार को स्क्रीन पर उतारा गया, तो एक्टर्स के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण रोल बन गया. अब तक कई दिग्गज कलाकारों ने रावण का किरदार निभाया है. किसी ने उसके क्रोध को दिखाया, तो किसी ने उसकी बुद्धिमत्ता को. लेकिन एक अभिनेता ऐसा भी रहा है, जिसने इस किरदार को इतनी गहराई से निभाया कि आज तक कोई उसे टक्कर नहीं दे सका.
1987 में प्रसारित हुए रामानंद सागर के धारावाहिक 'रामायण' में अरविंद त्रिवेदी ने रावण का किरदार निभाया था। उनके अभिनय में जो गंभीरता, गर्जना और वैचारिक गहराई थी, उसने उन्हें इस रोल के लिए अमर बना दिया। उन्होंने रावण के अंहकार, धर्म और अधर्म के बीच के संघर्ष, और उसकी त्रासदी को जिस तरह से जीवंत किया, वो भारतीय टेलीविजन इतिहास का एक अनमोल अध्याय बन गया। उनके डायलॉग बोलने का अंदाज़, आंखों की अभिव्यक्ति और शरीर की भाषा दर्शकों को भय और सम्मान दोनों का अनुभव कराती थी.
इसके बाद कई अभिनेताओं ने फिल्मों और टीवी शोज़ में रावण का रोल निभाया। जैसे सैफ अली खान ने ‘आदिपुरुष’ में इस किरदार को निभाने की कोशिश की, प्रभु देव, कमल हासन, और कई क्षेत्रीय अभिनेताओं ने भी रावण को अपने-अपने अंदाज़ में पेश किया। हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी रावण को आधुनिक दृष्टिकोण से दिखाने की कोशिशें हुईं। लेकिन इन सभी प्रस्तुतियों में वो गहराई और प्रभाव शायद ही कभी नजर आया जो अरविंद त्रिवेदी की अदाकारी में देखने को मिला.
असल में, रावण का किरदार सिर्फ गुस्से या क्रूरता से नहीं बनता उसमें विद्वान, शिव भक्त, पराक्रमी योद्धा और त्रिकालदर्शी जैसे कई पहलू छिपे होते हैं। अरविंद त्रिवेदी ने उन सभी परतों को अपने अभिनय से सामने लाया। यही वजह है कि जब भी स्क्रीन पर रावण की बात होती है, तो सबसे पहले उनका चेहरा ही ज़हन में आता है. आज भी दशहरे के समय जब राम-रावण युद्ध के दृश्य टीवी पर दोहराए जाते हैं, तो लोगों की ज़ुबान पर बस एक ही नाम आता है अरविंद त्रिवेदी. उन्होंने जो छवि बनाई, वह केवल एक कलाकार की नहीं, बल्कि एक युग की पहचान बन गई.