UP News: उत्तराखंड में जान गंवाने वाली दो सगी बहनों के शव लखनऊ पहुंच गए हैं। गुरुवार सुबह 10 बजे जैसे ही वर्तिका और दीपिका वर्मा के शव घर पहुंचे, चीख-पुकार मच गई। पिता फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने रोते हुए कहा- ये मेरी बेटियां नहीं थीं, मेरा नूर थीं। जिगर का टुकड़ा थीं। जहां जाती थीं, साथ जाती थीं। आज दोनों एक साथ हमें छोड़कर चली गईं। हमें नहीं पता था कि ये दिन भी देखना पड़ेगा।
दरअसल, उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर बर्फबारी की चपेट में आने से लखनऊ के गायत्रीपुरम में रहने वाली वर्तिका और दीपिका की मौत हो गई थी। दोनों को पहाड़ों पर ट्रेकिंग का शौक था। भारत-नेपाल के कई ट्रेक पूरे कर चुकीं बहनें केदारताल गई थीं। दोनों की तलाश में भाई अतुल वर्मा घरवालों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे थे। परिवार को हादसे की जानकारी ट्रेकिंग एजेंसी से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर खबर देखकर मिली थी।
पिता बोले- बेटियों को ट्रेकिंग का काफी शौक था
लखनऊ के गुडंबा स्थित गायत्रीपुरम निवासी पिता श्रीनारायण वर्मा ने बताया कि दोनों बेटियां कई जगह घूम चुकी थीं। ट्रेकिंग के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी थी, जहां वे न गई हों। इस शौक पर दोनों काफी पैसा खर्च करती थीं। 26 अक्टूबर को दोनों लखनऊ से उत्तराखंड के लिए निकली थीं। ट्रेकिंग दल में कुल 12 लोग थे। हादसे के बाद आठ लोगों को एयरलिफ्ट कर लिया गया था। बेटियों के शव मिलने की जानकारी क्षेत्रीय सांसद के प्रयासों से मिली।
पिता एक साल पहले कृषि विभाग से हुए रिटायर
मूलरूप से बाराबंकी के सराय पांडेय निवासी श्रीनारायण वर्मा कृषि विभाग से एक साल पहले रिटायर हुए हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं। वर्तिका सबसे बड़ी बेटी थी। वह गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में नौकरी करती थी। छोटी बेटी दीपिका मल्टीनेशनल कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर थी। वर्क फ्रॉम होम के चलते लखनऊ में रह रही थी। दीपिका ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से कोर्स किया था। परिवार में सबसे छोटा बेटा अतुल (25) है।
बड़ी बेटी की शादी की बात चल रही थी
पिता ने बताया कि दोनों बेटियों की अभी शादी नहीं हुई थी। बड़ी बेटी वर्तिका की शादी की बातचीत चल रही थी। दोनों अक्सर कहती थीं, पापा, हम जाएंगे तो आपको बहुत कुछ देकर जाएंगे। यह कहते हुए पिता फफक पड़े।