उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है. पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए 'लोक मोर्चा' के गठन की घोषणा की है. इस तीसरे मोर्चे को प्रदेश की जनता के लिए एक नए विकल्प के रूप में पेश किया गया है. मौर्य ने खुद को इस गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा कि यह मोर्चा ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ के सिद्धांत पर आधारित होगा.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने राजधानी लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि उन्होंने 9 छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर यह गठबंधन तैयार किया है, जो आगामी पंचायत और 2027 के विधानसभा चुनावों में भाग लेगा.
लोक मोर्चा में शामिल दलों की सूची:
1. अपनी जनता पार्टी – स्वामी प्रसाद मौर्य
2. राष्ट्रीय समानता दल – मोती लाल शास्त्री
3. सम्यक पार्टी – राजामणि सुव्वैया राय
4. जनसेवा दल – विनेश ठाकुर
5. पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी – राजेश सिद्धार्थ
6. सर्वलोकहित समाज पार्टी – सत्य नारायण मौर्य
7. स्वतंत्र जनता राज पार्टी – घनश्याम कोरी
8. सबका दल-यू – प्रमोद लोधी
9. लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी – राजकुमार सैनी
बीजेपी के वोट बैंक में लगा पाएंगे सेंध ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की तर्ज पर आगे बढ़ते हुए बीजेपी के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर मौर्य का यह दांव चलता है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान बीजेपी को हो सकता है, वहीं सपा को फायदा भी मिल सकता है. हालांकि वोटों का बंटवारा समाजवादी पार्टी के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है.
योगी सरकार पर जमकर बरसे मौर्य
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौर्य ने योगी सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी में कानून-व्यवस्था चौपट है, बेरोजगारी चरम पर है और महंगाई से आम जनता परेशान है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का निजीकरण हो गया है और गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित किया जा रहा है. किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा और आरक्षण को भी खत्म करने की साजिश चल रही है.
सपा के लिए दोधारी तलवार
स्वामी प्रसाद मौर्य जिन मुद्दों और जातीय समीकरणों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं, वे समाजवादी पार्टी के भी प्रमुख वोट बैंक का हिस्सा हैं. ऐसे में लोक मोर्चा का उभार सपा के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है. वोट बैंक में अगर बंटवारा हुआ तो इसका सीधा असर सपा और बीजेपी दोनों के प्रदर्शन पर पड़ेगा.
क्या तीसरा मोर्चा बनेगा गेमचेंजर?
फिलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगा कि लोक मोर्चा यूपी की राजनीति में कितनी बड़ी भूमिका निभा पाएगा. लेकिन दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने की इस कवायद ने सियासी हलकों में चर्चा जरूर तेज कर दी है.