Thiruvananthapuram Airport Closure : केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां मंदिर की धार्मिक शोभायात्रा को रास्ता देने के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही रोक दी जाती है। 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक हवाई अड्डे पर उड़ानों का परिचालन अस्थायी रूप से बंद रहेगा। इस दौरान न तो विमान उड़ान भर सकेंगे और न ही उतर सकेंगे। यह फैसला किसी तकनीकी खराबी या खराब मौसम के कारण नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के चलते लिया गया है।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जुड़ी परंपरा
यह परंपरा तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जुड़ी है। मंदिर में होने वाली अल्पासी आराट्टू शोभायात्रा के दौरान भगवान की मूर्तियों को पारंपरिक तरीके से बाहर ले जाया जाता है। इस धार्मिक यात्रा का रास्ता तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे से होकर गुजरता है। इसी वजह से शोभायात्रा के लिए रनवे को खाली रखा जाता है और विमान परिचालन कुछ घंटों के लिए रोक दिया जाता है।
शंगुमुघम बीच तक जाती है यात्रा
अल्पासी आराट्टू के दौरान मंदिर की मूर्तियों को विधि-विधान के साथ शंगुमुघम बीच ले जाया जाता है। वहां धार्मिक अनुष्ठान के तहत पवित्र स्नान कराया जाता है। इसके बाद मूर्तियों को वापस मंदिर लाया जाता है। इस पूरी यात्रा में हवाई अड्डे के रनवे का इस्तेमाल होता है। इसलिए प्रशासन और हवाई अड्डा प्रबंधन उड़ानों के समय में बदलाव करते हैं, ताकि धार्मिक यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
यात्रियों को दी गई जरूरी सलाह
तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रबंधन के अनुसार, 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक विमान सेवाएं निलंबित रहेंगी। इस बदलाव का असर कुछ उड़ानों के आने और जाने के समय पर पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी संबंधित विमानन कंपनी से उड़ान का ताजा समय पता कर लें। इससे उन्हें देरी या समय में बदलाव के कारण होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।
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त्रावणकोर के राजा से जुड़ा इतिहास
इस परंपरा का इतिहास तत्कालीन त्रावणकोर रियासत के समय से जुड़ा बताया जाता है। जानकारी के मुताबिक, राजा श्री चिथिरा थिरुनाल के शासनकाल में यह व्यवस्था तय की गई थी कि हवाई अड्डे पर साल के कुछ दिन भगवान पद्मनाभ की धार्मिक यात्रा के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे की स्थापना वर्ष 1932 में हुई थी। तब से इस परंपरा को निभाया जा रहा है।
साल में दो बार बदलता है उड़ानों का समय
अल्पासी आराट्टू के अलावा साल में एक अन्य धार्मिक शोभायात्रा के दौरान भी हवाई अड्डे के परिचालन में बदलाव किया जाता है। यह परंपरा धार्मिक आस्था और स्थानीय इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। आम तौर पर हवाई अड्डे पर उड़ानें तकनीकी कारणों, मौसम या सुरक्षा संबंधी वजहों से प्रभावित होती हैं, लेकिन तिरुवनंतपुरम में धार्मिक यात्रा के लिए भी रनवे खाली रखा जाता है। यही वजह है कि यह हवाई अड्डा अपनी इस अनोखी परंपरा के कारण चर्चा में रहता है।