Ekadashi: 23 मई शुक्रावार को यानि आज अपरा एकादशी है. हिन्दू धर्म में अपरा एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है.. देश में करोड़ों लोग अपरा एकादशी पर व्रत और पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं. प्रकांड पंडितों के मुताबिक यदि एकादशी व्रत के दौरान भक्तगण पूजा के बाद ये आरती करें तो भगवान विष्णु खुश हो जाते हैं और जीवन में शांति और सुख प्रदान करते हैं. आइये जानते हैं वह पूजा आरती जो भगवान विष्णु की आराधना मे की जाती है..
भगवान विष्णु की आरती
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ओम जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
सुख संपति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे…
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे…
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे…
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे…
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥
ओम जय जगदीश हरे…
जगदीश स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय जगदीश हरे…
एकादशी माता की आरती
ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी।।
ओम जय एकादशी माता…
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।।
ओम जय एकादशी माता…
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै।।
ओम जय एकादशी माता…
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै।।
ओम जय एकादशी माता…
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की।।
ओम जय एकादशी माता…