
नवरात्रि में घटस्थापना के साथ ही मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत होती है। इस पावन अवसर पर जौ (बरली) बोने की परंपरा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि यदि श्रद्धा और सही विधि से जौ बोए जाएं और वे हरे-भरे उगें, तो मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वर्ष भर घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
घटस्थापना और जौ बोने का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन, यानी घटस्थापना के दिन जौ बोए जाते हैं। इस वर्ष 2025 में घटस्थापना 3 अक्टूबर (शुक्रवार) को होगी। इस दिन सुबह शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा की पूजा कर जौ बोने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
जौ बोने के लिए आवश्यक सामग्री
जौ बोने के लिए कुछ विशेष वस्तुओं की आवश्यकता होती है —
एक साफ़ मिट्टी या तांबे का पात्र (थाली या कुंभ)
शुद्ध मिट्टी (गोमय मिश्रित हो तो और भी अच्छा)
साबुत जौ के बीज
गंगाजल या शुद्ध जल
एक छोटा कलश (यदि घटस्थापना के साथ कर रहे हों)
जौ बोने की सरल विधि
सबसे पहले जिस पात्र में आप जौ बोएंगे, उसे शुद्ध कर लें। अब उसमें 2–3 इंच मोटी मिट्टी की परत बिछाएं। इसके बाद जौ के दानों को समतल रूप से उस पर फैलाएं और ऊपर से हल्की मिट्टी की परत डाल दें। फिर गंगाजल या शुद्ध जल का हल्का छिड़काव करें। ध्यान रखें कि बीजों को ज़्यादा गहराई में न दबाएं और अधिक पानी न डालें, वरना बीज सड़ सकते हैं।
जौ की देखभाल कैसे करें
जौ बोने के बाद प्रतिदिन उसमें थोड़ा-सा जल छिड़कें। पात्र को ऐसी जगह रखें जहाँ पर्याप्त रोशनी हो लेकिन सीधी धूप न पड़े।