उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में सॉल्वर गैंग और छद्म परीक्षार्थियों की समस्या जस की तस है। अब तक बोर्ड परीक्षा में कुल 30 कैंडीडेट ऐसे पकड़े जा चुके हैं, जाे दूसरों की जगह परीक्षा देने पकड़े गए हैं।
‘वॉटर-टाइट’ जांच करने का अनुरोध
गौर करें तो साल 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में परिषद ने सख्त और निर्णायक कदम उठाए हैं। बावजूद इसके सॉल्वर पकड़े जा रहे हैं। इसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि बोर्ड वहां तक पहुंच नहीं पा रहा है। लिहाजा बोर्ड ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (डीजीपी) को पत्र लिखकर पकड़े गए सॉल्वरों की जड़ों तक पहुंचने और ‘वॉटर-टाइट’ जांच करने का अनुरोध किया है।
30 कैंडीडेट ऐसे पकड़े जा चुके हैं
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में सामूहिक नकल पर तो काफी हद तक लगाम लग गई है, पर सॉल्वर गैंग और छद्म परीक्षार्थियों की समस्या जस की तस है। अब तक बोर्ड परीक्षा में कुल 30 कैंडीडेट ऐसे पकड़े जा चुके हैं जाे दूसरों की जगह परीक्षा दे रहे थे।
सबूताें के अभाव में छूटने न पाएं सॉल्वर
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से उत्तर प्रदेश के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जारी ताजा आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी परीक्षा केंद्र पर पंजीकृत परीक्षार्थी की जगह छद्म परीक्षार्थी पकड़ा जाता है, तो अब केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं चलेगी। जांच ऐसी होनी चाहिए, जो अदालत में टिक सके और सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड तक पहुंच सके। यानी पकड़ो और ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी कोर्ट में पेश करो, ताकि सबूतों के अभाव में सॉल्वर छूटने न पाएं। परिषद ने साफ किया है कि यदि जांच में परीक्षा केंद्र स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित कक्ष निरीक्षक, केंद्र व्यवस्थापक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
2020 में कैसे खुला था सॉल्वर नेटवर्क
यूपी बोर्ड परीक्षा 2020 के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और दस्तावेज सत्यापन में कई विसंगतियां सामने आई थीं। प्रवेश पत्र की फोटो, उपस्थिति पत्रक और उत्तर पुस्तिका की लिखावट में अंतर पाया गया। कुछ जिलों से यह भी रिपोर्ट आई कि वास्तविक छात्र परीक्षा केंद्र पर आया ही नहीं था, उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति ने परीक्षा दी।
बोर्ड स्तर की जांच में यह साफ हुआ कि यह केवल एक-दो केंद्रों तक सीमित मामला नहीं था। कई जिलों में दलालों, कोचिंग नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के संकेत मिले। इसके बाद कई संदिग्ध मामलों को पुलिस जांच के लिए भेजा गया और परिणाम निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी हुई।
2026 में भी मंडरा रहा खतरा, और अधिक सख्ती के निर्देश
सचिव भगवती सिंह ने बताया कि 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से चल रही हैं। इसी दौरान आगरा, एटा, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, शाहजहांपुर, फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, इटावा, कन्नौज, झांसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, गोंडा और गोरखपुर जैसे जिलों से परिषद को संकेत मिले कि कुछ स्थानों पर फिर से सॉल्वर बैठाने का प्रयास हो रहा है।