
मुजफ्फरनगर। पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर आरके गोयल के साथ साइबर फ्रॉड करने वाले बदमाशों द्वारा पुलिस, ईडी सीबीआई के अधिकारी बनकर उन्हें एक घोटाले में डिजिटल अरेस्ट करके 33.33 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को थाना साइबर क्राइम के प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह के नेतृत्व में टीम ने गिरफ्तार कर लिया है इनमें एक साइबर ठग पंजाब का जबकि दो छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले महीने 11 सितंबर 2025 को पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर आरके गोयल द्वारा थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर को लिखित तहरीर देकर अवगत कराया कि उनके फोन पर एक कॉल आयी जिसमें स्वंय को टीमआरआई और ईडी का अधिकारी बताते हुए कहा गया कि आपके द्वारा कैनरा बैंक में खाता खुलवाया गया है, जिसमें अवैध धन का लेन- देन बडी मात्रा में आपके द्वारा किया गया है, जिसके सम्बन्ध में थाना दरियागंज दिल्ली पर आपके विरुद्ध शिकायत व अभियोग दर्ज किया गया है। जब तक जाँच होगी तबतक आपको डिजिटल अरेस्ट किया जाता है।
इसके बाद दरियागंज पुलिस थाना, दिल्ली का लोगो लगा व्हाटसएप काॅल वादी पर आया, जिसमें अपने आपको दरियागंज थाने का आईपीएस अफसर बताया तथा केनरा बैंक के खाते में अवैध धन के लेन-देन की बात कही तथा इस बाबत वादी मुकदमा से एक प्रार्थना पत्र लिखवाकर लिया कि उसके द्वारा कोई भी अवैध गतिविधि नहीं की गयी है, इसके उपरान्त सीबीआई अफसर का व्हाटसएप काल आया, जिसपर भी सीबीआई का लोगो लगा था, इसके द्वारा भी वही बात दोहराई गयी तथा वादी मुकदमा से फिर लिखित में एक प्रार्थना पत्र लिया गया तत्पश्चात माननीय न्यायालय का लोगो लगा नम्बर से व्हाटसएप काल आया जिनके द्वारा अपने आप को न्यायालय का जज बताते हुए खातों में अवैध लेनदेन की बात कही गयी तथा न्यायालय के सील मोहर लगे हुए एक कूट रचित लैटर पीडीएफ के माध्यम से मुकदमा वादी को भेजी गयी, जिसमें डिजिटल अरेस्ट होने जैसी बातें लिखी थी तथा केस को पूरा खत्म करने के नाम पर वादी को डरा धमकाकर तथा भय में डालकर 33.33 लाख रुपये ठग लिये। इस प्रकार वादी मुकदमा से टीआरआई, ईडी, सीबीआई और न्यायालय के न्यायाधीश बनकर वादी को मनी लांड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाकर डिजिटल अरेस्ट करते हुए 33,33 लाख रूपयों की धोखाधडी की गयी वादी से प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना साइबर क्राइम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया तथा अभियुक्तगण की गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम का गठन किया गया।
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर सुल्तान सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम द्वारा 11 अक्टूबर 2025 को अमृतसर पंजाब से तीन अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। उक्त प्रकरण में समस्त तकनीकी कार्यवाही साइबर थाने पर नियुक्त महिला पुलिस टीम द्वारा की गयी तथा संदिग्ध की तस्दीक भी महिला पुलिस टीम द्वारा की गयी है।गिरफ्तार अभियुक्तों में राजू पुत्र स्व. दीपक कुमार नि. मकान नंबर 43 एफ केएलसी ध्रुव थाना कुर्सी पार, भिलाई छत्तीसगढ, संदीप सिहं उर्फ सुन्नी पुत्र लखविंदर सिहं निवासी राया खुर्द थाना व्यास जिला अमृतसर पंजाब तथा अमन सिन्हा पुत्र अशोक सिन्हा निवासी मकान नंबर 336 रेलवे काँलोनी वार्ड नं0 27 थाना डल्ली रजहारा जिला बालोड छत्तीसगढ शामिल है। पुलिस ने इनके कब्जे से 06 मोबाइल फोन, 06 पासबुक, 21 डेबिट कार्ड, 01 चैक बुक, 14 सिम कार्ड , 01 पेन कार्ड, 03 आधार कार्ड बरामद किए हैं।
मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि 11 सितंबर 2025 को रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी इंजीनियर आरके गोयल की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद एक हफ्ते में ही इस घटना का खुलासा करते हुए 18 सितंबर 2025 को उक्त घटना को कारित करने वाले 02 अभियुक्तगण को गिरफ्तार किया गया था। उक्त अभियोग में 01 अभियुक्त प्रकाश में आया जिसे हां 25 सितंबर को सूरत से गिरफ्तार किया गय़ा। गिरोह के फार्वर्ड-बैकवर्ड लिंकेज खंगाले गये तथा साइबर क्राइम टीम द्वारा गिरोह के 03 सदस्यों को रविवार 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि उनका भिलाई छत्तीसगढ़ साथी राजू निवासी भिलाई छत्तीसगढ जो वर्तमान में ऋषिकेश में ही रहता है, वह इस कार्य का सरगना है। राजू ही छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, आदि राज्यों से बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चैकबुक, सिमकार्ड , आदि भोले भाले लोगों को लालच देकर प्राप्त कर उनमें विदेशों में बैठे साइबर ठगों से सांठ गांठ कर पैसे डलवाता है, जिन्हें हम लोग एटीएम, चैक, आदि के माध्यम से कैश के रुप में निकाल लेते है, तथा निखिल गोयल व राजू उपरोक्त मिलकर अपना हिस्सा काटकर बाकि बचे पैसों की क्रिप्टोकरंसी खरीद कर विदेश में बैठे साइबर ठगों को भेज देते है। अभियुक्त निखिल गोयल को साइबर क्राइम टीम द्वारा दिनांक 18.09.2025 को उसके 02 अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर थाने पर नियुक्त महिला मुख्य आरक्षी मिनाक्षी व महिला आरक्षी अंशु द्वारा अभियुक्तगण से बरामद खातों को गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम से संबंधित पोर्टल पर चैक किया गया तो बरामद खातों एक करोड रुपए से अधिक की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज पाई गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अभियुक्तगण से बरामद बैंक खातों के विरुद्ध अभी तक 24 करोड रुपये की ज्ञात धोखाधडी की करीब 16 शिकायतें दर्ज है।