पुलिस ने शराब पीने के बाद हुई तीन लोगों की हत्या का सनसनीखेज राजफाश किया है। हत्या शराब पीने से नहीं हुई थी, बल्कि शराब में पोटेशियम साइनाइड मिलाया गया था, जिसका पैग पीते ही तीन लोगों की एक घंटे के अंतराल में मौत हो गई और इसकी पूरी पटकथा मारे गए युवक अंकित की बहन और उसके प्रेमी ने आठ करोड़ की संपत्ति हड़पने और अवैध संबंधों का विरोध करने पर लिखी थी। बहन का मकसद सिर्फ भाई की हत्या करना था, लेकिन बेआई में कारोबारी और उसके नौकर की भी साइनाइड वाला पैग पीते ही मौत हो गई। पुलिस ने अंकित की बहन, उसके प्रेमी और साइनाइड उपलब्ध कराने वाले सराफ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
शराब जहरीली नहीं निकली
पुलिस लाइन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया, तीन अप्रैल को दौराला कस्बे में शराब पीने के बाद स्पेलर संचालक बाबूराम प्रजापति, उनके नौकर जितेंद्र कश्यप व अंकित की मौत हो गई थी। शुरूआत में जहरीली शराब पीने से मौत का हल्ला मचा था, लेकिन फोरेंसिक जांच के दौरान शराब जहरीली नहीं निकली। पूरे मामले की तहत तक जाने के लिए एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह, सीओ दौराला प्रकाश चंद अग्रवाल के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गई थी। पड़ताल के दौरान पुलिस टीम ने 50 से अधिक स्थानों पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले थे, लेकिन तीनों में से कोई भी व्यक्ति ठेके से शराब खरीदता नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने मुखबिरी तंत्र का सहारा लिया तो जांच के दौरान पता चला कि अंकित की बहन अलका के मनोहर पट्टी निवासी पवन अहलावत उर्फ पोली से अवैध संबंध है। पुलिस टीम ने जब इस बिंदु पर पड़ताल की तो परत दर परत तीन लोगों की मौत की गुत्थी सुलझती गई और पुलिस टीम ने रविवार को अंकित की बहन अलका, उसके प्रेमी पवन निवासीगण मनोहर पट्टी व सराफ अशोक वर्मा निवासी मोहनपुरी मोहल्ला को गिरफ्तार कर लिया।
500 रुपये में खरीदा था मौत का सामान
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया, जांच के दौरान पता चला था कि 50 वर्षीय पवन के 42 वर्षीय अलका से प्रेम संबंध थे। अलका का भाई अंकित इसका विरोध करता था। भाई के उत्पीड़न से परेशान अलका ने पवन से अंकित की रास्ते से हटाने के लिए होली पर पटकथा लिखी थी। दोनों चाहते थे किसी को शक ना हो और अंकित को मौत ऐसी दी जाए, क्योंकि अंकित शराब पीने का आदि था, लिहाजा पवन व अलका ने उसे खाने में जहर देकर मारने की योजना बनाई। जहर के लिए पवन ने सराफ अशोक वर्मा से संपर्क किया तो सराफ ने बताया था कि सफेद रंग की एक ऐसी गोली होती है, जिसके चखते ही आदमी मर जाता है। पवन ने अशोक से वह गोली लाने के लिए कहा तो अशोक ने बताया, उसे सुनार का काम बंद करे हुए दस साल हो गए।
पोटेशियम सायनाइड की गोली लाकर दे दी
इसके बाद पवन ने सराफ को रुपयों का लालच दिया तो पांच सौ रुपये लेकर अशोक ने पवन को पोटेशियम सायनाइड की गोली लाकर दे दी। पवन ने गोली अलका को दे दी थी। होली के बाद अलका न पवन को पोटेशियम साइनाइड खिलाने का प्रयास किया था, लेकिन किसी कारण से वह नहीं खिला पाई थी। इसके बाद पवन ने अंकित को मौत के घाट उतारने का जिम्मा लिया और उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए पवन ने परिचित कल्लू को सौ रुपये देकर देशी शराब का पव्वा मंगवाया और उसमें छेद कर पोटेशियम सायनाइड की गोली डाल दी। अंकित को शक न हो पवन ने बाजार से रविदत्त की दुकान से फेवीक्विक खरीदी और शराब के पाउच पर चिपका कर छेद बंद कर दिया था और घटना वाले दिन अंकित को रास्ते में पवन ने देशी शराब के पव्वा दे दिया था, लेकिन पवन को नहीं पता था कि अंकित सायनाइड मिली शराब को स्पेलर संचालक बाबूराम प्रजापति और उनके नौकर जितेंद्र के साथ बैठकर पीएगा।