मध्य प्रदेश को विकास और पर्यटन की दिशा में नई पहचान देने जा रही है ‘टाइगर कॉरिडोर’ की सौगात। जबलपुर में बनाए जाने वाले इस कॉरिडोर से प्रदेश के चार बड़े नेशनल पार्क- बांधवगढ़, पन्ना, पेंच और कान्हा सीधे जुड़ेंगे। इससे न सिर्फ वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को नई उड़ान मिलेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी। साथ ही, 60 हजार करोड़ के विकास कार्यों की मंजूरी से जबलपुर और पूरे एमपी में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
जबलपुर बनेगा टाइगर टूरिज्म का हब
जबलपुर में बनने वाला टाइगर कॉरिडोर राज्य को एक नई दिशा देगा। इस कॉरिडोर के जरिए देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट सीधे चार बड़े टाइगर रिजर्व तक पहुंच पाएंगे। बांधवगढ़, पन्ना, पेंच और कान्हा से सीधा कनेक्शन होने से वाइल्ड लाइफ प्रेमियों को सुविधा मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
60 हजार करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
कॉरिडोर के साथ ही मध्य प्रदेश को 60 हजार करोड़ के विकास कार्यों की मंजूरी मिली है। इसमें नए एक्सप्रेसवे, चौड़ी सड़कें, आधुनिक फ्लाईओवर, रोपवे और 135 सीटर एसी बसें शामिल हैं। ये प्रोजेक्ट्स न सिर्फ शहरों को जोड़ेंगे बल्कि पर्यटन और उद्योगों को भी गति देंगे।
आदिवासी अंचलों को मिलेगा नया रोड नेटवर्क
जबलपुर से मंडला तक आदिवासी इलाकों को जोड़ने के लिए नई सड़क का निर्माण भी स्वीकृत हुआ है। इससे न केवल आदिवासी क्षेत्रों का विकास होगा बल्कि रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा होंगे।
आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा
टाइगर कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं से जबलपुर व मध्य प्रदेश को सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से बड़ा लाभ मिलेगा। पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और प्रदेश की पहचान ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में और मजबूत होगी।