भारत में TikTok की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन इससे पहले भोपाल से एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। यहां अस्पतालों में युवाओं के बीच माइग्रेन, डिप्रेशन और इंसोमनिया जैसे मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया और रील्स देखने की आदत युवाओं को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है। लगातार बढ़ते केसों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है।
सोशल मीडिया की लत से बिगड़ रही सेहत
आज की युवा पीढ़ी घंटों मोबाइल स्क्रीन पर रील्स देखने में समय बर्बाद कर रही है। इस लत के कारण वे न सिर्फ अपनी नींद, बल्कि भूख और प्यास तक भूल जाते हैं। लगातार स्क्रॉलिंग और देर रात तक जागने से युवाओं में मानसिक तनाव, सिर दर्द और आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
भोपाल अस्पतालों में बढ़े केस
भोपाल के जेपी अस्पताल में रोजाना ऐसे कई केस दर्ज हो रहे हैं, जिनमें युवा माइग्रेन, डिप्रेशन और आंखों में जलन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, नींद पूरी न होने और अधिक स्क्रीन टाइम की वजह से यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
रिसर्च में भी आया सच सामने
एक हालिया रिसर्च में पाया गया कि सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल युवाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। अध्ययन में सामने आया कि 60 प्रतिशत लोग आंखों की बीमारी से जूझ रहे हैं, जबकि 83 प्रतिशत लोग माइग्रेन और डिप्रेशन जैसी स्थितियों से प्रभावित हैं।
डॉक्टरों ने दिए सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने से कम से कम 40 मिनट पहले मोबाइल बंद कर देना चाहिए ताकि शरीर को रिलैक्स होने का समय मिल सके। इसके अलावा स्क्रीन टाइम घटाना, ब्लू-लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करना और खुली हवा में समय बिताना मानसिक तनाव को कम करने में मददगार हो सकता है।