Tips For Good Parents : बचपन से किशोरावस्था और फिर युवावस्था की ओर बढ़ते बच्चों का व्यवहार, सोच और ज़रूरतें तेजी से बदलती हैं. इस दौर में वे स्वतंत्रता चाहते हैं, अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और अक्सर खुद को समझने की कोशिश करते हैं.यही समय होता है जब माता-पिता की भूमिका केवल एक संरक्षक की नहीं, बल्कि एक सच्चे दोस्त की होनी चाहिए.
अगर इस उम्र में माँ-बाप और बच्चे के बीच संवाद और समझदारी की खाई रह जाती है, तो बच्चा गलत राह पकड़ सकता है या मानसिक रूप से अकेलापन महसूस करने लगता है. ऐसे में ज़रूरी है कि माता-पिता समझदारी से कदम उठाएँ और कुछ आम गलतियों से बचें. माँ-बाप कैसे बनें बच्चों के दोस्त?
1. खुलकर बात करें:
बच्चों के साथ संवाद करना सबसे पहली और ज़रूरी बात है. उनसे सिर्फ पढ़ाई या अनुशासन की बात न करें, बल्कि उनकी रुचियों, दोस्तों, पसंद-नापसंद और परेशानियों के बारे में भी दिल से बात करें.
2. जजमेंटल न बनें:
जब भी बच्चा कोई गलती करे या कुछ अलग सोचे, तो उसे डाँटना या नीचा दिखाने की बजाय उसकी भावनाओं को समझें. अगर वह डरेगा, तो कभी अपनी बात आपके साथ नहीं बाँटेगा.
3. गर्व ज़ाहिर करें:
जब बच्चा कुछ अच्छा करता है, तो उसकी तारीफ ज़रूर करें. इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह आपसे जुड़ाव महसूस करता है.
4. नियंत्रण नहीं, मार्गदर्शन दें:
बच्चों पर हर बात का नियंत्रण रखना उन्हें विद्रोही बना सकता है. उन्हें अपनी गलतियाँ खुद सुधारने का मौका दें, लेकिन साथ में यह विश्वास भी दें कि आप उनके साथ हैं.
5. उनकी निजता का सम्मान करें:
जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे अपनी निजी जगह (privacy) चाहते हैं. उन पर नजर रखें लेकिन उन्हें यह महसूस न होने दें कि आप उनकी हर गतिविधि पर शक कर रहे हैं. ये गलतियाँ न करें: बच्चों की तुलना दूसरों से न करें. उनकी हर बात को अनुशासन या 'बदतमीज़ी' का नाम न दें. मोबाइल या सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर केवल पाबंदियाँ न लगाएँ, बल्कि उसके सही इस्तेमाल की समझ दें.
बच्चों की भावनाओं को 'बचकाना' कहकर न टालें. बच्चे जब बड़े होते हैं, तो वे केवल आपके निर्देशों के नहीं, आपकी समझ और साथ के ज़्यादा ज़रूरतमंद होते हैं. एक दोस्ताना रिश्ता उन्हें न सिर्फ सुरक्षित महसूस कराता है, बल्कि उन्हें एक अच्छा इंसान भी बनाता है. माँ-बाप अगर समझदारी से व्यवहार करें, तो बच्चे जीवन भर उन्हें अपना सबसे बड़ा सहारा मानते हैं.