TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। बागी विधायकों की नाराजगी और संगठन के भीतर उठे सवालों के बावजूद ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर अपना भरोसा बरकरार रखा है। साथ ही, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
अभिषेक बनर्जी को फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी
कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर हुई अहम बैठक में पार्टी संगठन का पुनर्गठन किया गया। इस दौरान अभिषेक बनर्जी को एक बार फिर टीएमसी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। ममता बनर्जी राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बनी रहेंगी। पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि नेतृत्व को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं है और संगठन अपने मौजूदा ढांचे के साथ आगे बढ़ेगा।
संगठन में हुए कई अहम बदलाव
बैठक में कई प्रमुख पदों पर नियुक्तियों की घोषणा की गई। डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि सयानी घोष को युवा संगठन की कमान दी गई। माला रॉय को महिला इकाई का अध्यक्ष बनाया गया और चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। पार्टी का कहना है कि इन बदलावों से संगठन को नई मजबूती मिलेगी।
नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति पर कानूनी लड़ाई
टीएमसी ने बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिए जाने का विरोध किया है। पार्टी का आरोप है कि यह फैसला नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। इसी कारण टीएमसी ने इस नियुक्ति को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है और जल्द ही याचिका दाखिल की जाएगी।
बागी विधायकों को खुली चुनौती
पार्टी नेता कल्याण बनर्जी ने बागी विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में जनता और कार्यकर्ताओं का समर्थन होने का दावा करते हैं तो उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर इसका प्रमाण देना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि ममता बनर्जी ही पार्टी की निर्विवाद नेता हैं और संगठन उनके नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगा। टीएमसी का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक संकट का सामना संगठनात्मक मजबूती और कानूनी लड़ाई दोनों स्तरों पर किया जाएगा।