पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लेकर नया सियासी विवाद सामने आया है। पार्टी के बागी सांसदों के एक गुट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताया। गुट का दावा है कि उसे पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन हासिल है। चुनाव आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में बागी नेताओं ने संगठन में अपने बहुमत का दावा करते हुए अपनी बात रखी। हालांकि इन दावों पर अभी चुनाव आयोग की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
दो-तिहाई समर्थन होने का दावा
बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद कहा कि 22 जून को कोलकाता में हुई बैठक में नई राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया था, जिसकी जानकारी 23 जून को आयोग को दे दी गई थी। उनका दावा है कि पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक, कई पार्षद और जिला परिषद सदस्य उनके साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में परिवारवाद और तानाशाही का माहौल बन गया है, जिसके खिलाफ यह पूरी लड़ाई लड़ी जा रही है। बागी गुट का कहना है कि वह संगठन को पुराने स्वरूप में वापस लाना चाहता है।
'असली TMC हम हैं' का दावा
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में टूट नहीं हुई है, बल्कि उनका गुट ही असली पार्टी है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग को इस संबंध में पहले ही पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी के बयानों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और अब फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा। हालांकि पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व की ओर से इन दावों को लेकर अलग रुख सामने आ सकता है। फिलहाल मामला चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं के दायरे में है।
विधायकों की संख्या पर भी विवाद
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायक बताए जा रहे हैं। बागी गुट का दावा है कि उसके साथ 64 विधायक हैं, जबकि मूल नेतृत्व के साथ केवल 20 विधायक बचे हैं। दूसरी ओर, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए एक प्रस्ताव में कथित हस्ताक्षर गड़बड़ी का मामला भी सामने आया है। इस पूरे विवाद की जांच राज्य की सीआईडी कर रही है, जिससे राजनीतिक घटनाक्रम और तेज हो गया है।
जांच के बाद और बढ़ा सियासी विवाद
हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद सीआईडी ने जांच शुरू की थी। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निलंबित कर दिया। वहीं बागी गुट ने दावा किया कि उसके समर्थन में 60 से अधिक विधायक हैं और उसने नया प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा। रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष ने उस प्रस्ताव पर कार्रवाई करते हुए रितब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी। हालांकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है।
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चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी नजर
अब पूरे मामले पर सभी की निगाहें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर हैं। आयोग को बागी गुट की ओर से बहुमत और संगठन पर दावे से जुड़े दस्तावेज सौंपे गए हैं, जिनकी जांच की जा सकती है। दूसरी ओर, पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व का पक्ष और उपलब्ध कानूनी रिकॉर्ड भी प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आयोग और अन्य संबंधित संस्थाएं उपलब्ध तथ्यों व नियमों के आधार पर क्या निर्णय लेती हैं। फिलहाल मामला राजनीतिक दावों और जांच की प्रक्रिया के बीच बना हुआ है।