आज 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। मंगलवार होने के कारण बजरंगबली की आराधना का भी विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में पंचांग के पांच अंगों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दिन के शुभ-अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। आज आश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। आइए जानते हैं आज के पंचांग, पूजा के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
आज की तिथि, वार और नक्षत्र का विवरण
आज मंगलवार है और विक्रम संवत 2083 चल रहा है। आश्विन शुक्ल तृतीया तिथि रात 11:27 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी आरंभ होगी। आज विशाखा नक्षत्र रात 1:43 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अनुराधा नक्षत्र शुरू होगा। प्रीति योग रात लगभग 8:24 बजे तक है, इसके बाद आयुष्मान योग लगेगा। सूर्योदय सुबह लगभग 6:19 बजे और सूर्यास्त शाम 5:52 बजे होगा। ये समय मेरठ के स्थानीय पंचांग के अनुसार हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर दीपक जलाकर माता का ध्यान करें। आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा। वहीं अमृत काल शाम 4:14 बजे से 5:57 बजे तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह लगभग 4:49 से 5:37 बजे तक माना गया है। इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है। मुहूर्तों का समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
मंगलवार को राहुकाल दोपहर लगभग 2:58 बजे से शाम 4:25 बजे तक रहेगा। इस दौरान नई शुरुआत या महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। यमगंड सुबह 9:12 से 10:39 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 12:05 से 1:32 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह लगभग 8:37 से 9:24 बजे तक है। हालांकि, पूजा-पाठ और नियमित धार्मिक गतिविधियों के लिए अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
दिशाशूल और आज का चौघड़िया
आज मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, उत्तर दिशा की ओर लंबी यात्रा करने से पहले लोग विशेष सावधानी या परंपरागत उपाय अपनाते हैं। चौघड़िया के शुभ समय जानने के लिए स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर तैयार पंचांग देखना चाहिए। दिन के चौघड़िया में चर, लाभ, अमृत और शुभ जैसे समयखंडों को सामान्यतः अनुकूल माना जाता है, जबकि रोग, काल और उद्वेग को अशुभ श्रेणी में रखा जाता है। इनके सटीक समय स्थान के अनुसार अलग-अलग होते हैं।
मंगलवार व्रत और मां चंद्रघंटा की आराधना का महत्व
आज नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के साथ हनुमानजी की पूजा करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भक्त माता को फूल, फल और सात्विक भोग अर्पित कर सकते हैं। मंगलवार का व्रत रखने वाले बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा का पालन करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से पूजा करने पर साहस, आत्मबल और मानसिक शांति की प्रेरणा मिलती है। पंचांग के समय ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं, इसलिए किसी विशेष मांगलिक कार्य से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।