
शनिवार, 26 जुलाई 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह दिन शनि देव को समर्पित होता है और इस दिन का व्रत रखने से शनि की कृपा प्राप्त होती है। आज का पंचांग कई शुभ संयोगों से युक्त है – विशेषकर व्यतीपात योग और अश्लेषा नक्षत्र जैसे दुर्लभ योग इस दिन को और भी खास बना रहे हैं। आइए जानें आज के दिन की पूरी पंचांगीय जानकारी, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि आज का पंचांग (26 जुलाई 2025 – शनिवार)
वार: शनिवार
तिथि: त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)
नक्षत्र: अश्लेषा
योग: व्यतीपात
सूर्योदय: 05:41 AM
सूर्यास्त: 07:12 PM
चंद्रमा: कर्क राशि में
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:56 AM से 12:50 PM तक
विवाह या शुभ कार्य हेतु मुहूर्त: आज का दिन शुभ कार्यों के लिए सामान्य है। अश्लेषा नक्षत्र और व्यतीपात योग के चलते निर्णय सोच-समझकर लें।
गृह प्रवेश / वाहन खरीद: इन कार्यों के लिए पंचांग विशेष ध्यान से देखें या पंडित से परामर्श लें।
शनिवार व्रत और शनि पूजा
शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से फलदायी है।
पूजा विधि: सुबह स्नान करके काले तिल, काली उड़द, लोहे का दान करें और पीपल वृक्ष की पूजा करें।
मंत्र जाप: "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
भोग: शनि देव को सरसों के तेल से बने पकवान और उड़द की दाल अर्पित करें।
आज का राहुकाल
राहुकाल: सुबह 09:00 AM से 10:30 AM तक
इस समय कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
व्यतीपात योग और अश्लेषा नक्षत्र
व्यतीपात योग को अत्यंत प्रभावशाली और उग्र योग माना जाता है। इसमें किए गए उपाय शीघ्र फल देते हैं। वहीं, अश्लेषा नक्षत्र आध्यात्मिक उन्नति और गूढ़ रहस्यों की खोज के लिए अनुकूल होता है।
यानने योग्य बात
आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शनि पूजा, व्रत और साधना करने वालों के लिए शनिवार, व्यतीपात योग और अश्लेषा नक्षत्र का संगम विशेष फलदायक सिद्ध हो सकता है। ध्यान और पूजा के माध्यम से इस दिन को और अधिक पवित्र बनाएं।