मानसून की दस्तक के बावजूद आम लोगों को महंगाई से राहत मिलती नहीं दिख रही है। रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा माने जाने वाले टमाटर की कीमतें एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगी हैं। देश के कई राज्यों में टमाटर महंगा बिक रहा है, जिससे घरों का मासिक बजट प्रभावित होने लगा है। मौसम की मार, तेज गर्मी और मानसून की धीमी शुरुआत के कारण फसल प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर बाजार में सप्लाई और कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
सप्लाई घटी, बाजार में बढ़े दाम
देश के प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों से आवक कम होने के कारण खुदरा बाजार में कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने की तुलना में टमाटर के खुदरा दाम करीब 16 प्रतिशत बढ़ चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले इनमें लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में रोजमर्रा के भोजन में टमाटर का उपयोग करने वाले परिवारों का खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है।
मौसम बना सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार टमाटर की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां हैं। तेज गर्मी और कई इलाकों में फसल प्रभावित होने से उत्पादन और सप्लाई दोनों पर असर पड़ा है। हालांकि अनुमान है कि पूरे सीजन में कुल उत्पादन पिछले साल से अधिक हो सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
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हर साल इन महीनों में बढ़ती है महंगाई
टमाटर ऐसी फसल है जो मौसम पर काफी निर्भर करती है। यदि किसी बड़े उत्पादक राज्य में अत्यधिक बारिश, गर्मी या अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल खराब होती है तो इसका असर पूरे देश के बाजारों में दिखाई देता है। यही कारण है कि जून से अगस्त और अक्टूबर से नवंबर के बीच टमाटर की कीमतों में अक्सर तेज बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस बार भी यही स्थिति बनती नजर आ रही है।
घरों से लेकर कारोबार तक असर
बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की लागत भी बढ़ने लगी है। कई खाद्य कारोबारियों ने खर्च नियंत्रित रखने के लिए टमाटर का उपयोग सीमित करना शुरू कर दिया है। यदि आने वाले दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।