Tomato Prices Fall 65% : महाराष्ट्र के नासिक जिले की पिंपलगांव कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में टमाटर की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर भारी गिरावट दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, थोक बाजार में 20 किलो टमाटर की क्रेट का औसत भाव 12 अक्टूबर को 321 रुपये था, जो सोमवार तक घटकर 111 रुपये रह गया। यानी कीमतों में करीब 65 प्रतिशत की कमी आई है। इस गिरावट ने उन किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जो पहले से खेती की बढ़ती लागत और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे हैं।
खुदरा बाजार में भी सस्ते हुए टमाटर
थोक कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। नासिक में सोमवार को टमाटर करीब 20 रुपये प्रति किलो बिके, जबकि एक सप्ताह पहले इनकी कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलो थी। इस तरह खुदरा भाव में भी करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, थोक मंडी में कीमतें घटने का असर दुकानों तक पहुंचने में एक-दो दिन लग सकते हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में ग्राहकों को टमाटर और कम कीमत पर मिल सकते हैं।
मंडी में रोज पहुंच रहीं लाखों क्रेट
पिंपलगांव APMC के एक अधिकारी के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से मंडी में प्रतिदिन लगभग 3 लाख से 3.75 लाख क्रेट टमाटर पहुंच रहे हैं। बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में माल आने के मुकाबले मांग कमजोर बनी हुई है। इसी असंतुलन के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है। सोमवार को टमाटर की गुणवत्ता के अनुसार प्रति क्रेट भाव 20 रुपये से लेकर 331 रुपये तक रहे। खराब गुणवत्ता वाले टमाटर करीब एक रुपये प्रति किलो तक बिके, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटरों का भाव लगभग 16.55 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा।
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गर्मी से जल्दी पक रही टमाटर फसल
व्यापारियों और मंडी अधिकारियों के अनुसार, तापमान बढ़ने के कारण टमाटर सामान्य से जल्दी पक रहे हैं। इससे फसल की आवक एक साथ बढ़ गई है और बाजार में उपलब्धता अधिक हो गई है। दूसरी ओर, मांग में अपेक्षित तेजी नहीं आने से किसानों को उचित कीमत नहीं मिल पा रही है। किसानों के लिए स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई जैसी खेती की लागत का बोझ बना हुआ है। जब उपज की कीमत लागत के मुकाबले कम हो जाती है, तो उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ता है।
कमजोर मांग ने बढ़ाई किसानों की चिंता
मंडी अधिकारियों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कारोबार में सुस्ती रही और कई थोक मंडियों के बंद रहने से व्यापार प्रभावित हुआ। इसके अलावा, निर्यात की मांग भी कमजोर बताई गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े खपत वाले राज्यों ने अपनी जरूरतें स्थानीय आपूर्ति से पूरी करना शुरू कर दिया है। इससे नासिक के टमाटरों की मांग पर असर पड़ा है। व्यापारियों को आशंका है कि यदि आवक ज्यादा और मांग कमजोर बनी रही, तो कीमतों में और गिरावट आ सकती है।