मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बच्चों की मौतों के बाद सामने आए ज़हरीले कफ सिरप मामले ने न्यायपालिका को भी झकझोर दिया है। अदालत ने इसे मेडिकल इतिहास के सबसे चौंकाने वाले मामलों में से एक बताते हुए दवा वितरक द्वारा राहत मांगने वाली याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। मामले में डॉक्टरों से लेकर फार्मा कंपनी तक आरोपियों पर कार्रवाई जारी है, जबकि एसआईटी की जांच में सिरप में खतरनाक रसायन पाए जाने की पुष्टि हो चुकी है।
वितरक की याचिका खारिज, अदालत का सख्त रुख
मामले में दवा वितरक ने अपनी दुकान सील होने और लाइसेंस निलंबन के खिलाफ अदालत में राहत मांगी थी। हालांकि दोनों ही अदालतों ने स्पष्ट कहा कि ऐसा गंभीर मामला किसी प्रकार की रियायत योग्य नहीं है। अदालत ने कहा कि अगस्त से अक्टूबर महीनों के बीच जिन बच्चों की जान गई, वह इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाता है। इसलिए इस स्तर की लापरवाही को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
जांच में डायथिलीन ग्लाइकॉल की पुष्टि
एसआईटी की विस्तृत जांच में यह सामने आया कि कोल्ड्रिफ नामक कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल मिला हुआ था—एक अत्यंत जहरीला रसायन जो किडनी फेलियर का कारण बनता है। यही वजह रही कि सिरप पीने वाले कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ी और कुछ ही दिनों में मौत हो गई।
इस खुलासे के बाद कई राज्यों में इस सिरप पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया।
डॉक्टर, निर्माता और सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई
मामले में डॉक्टर दंपति, सिरप निर्माता और सप्लाई चेन से जुड़े कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। दवा वितरक के कई ठिकानों पर छापे मारकर दवाएं जब्त की गईं। प्रशासन ने दुकान सील कर लाइसेंस निलंबित किया, जिसे चुनौती देने की कोशिश अब अदालत में भी असफल हो चुकी है।
अदालत की टिप्पणी ने बढ़ाई सख्ती
अदालत ने कहा कि बच्चों की मौतें किसी भी प्रणाली के लिए चेतावनी हैं। यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर विफलता है। इसी आधार पर अदालत ने दवा वितरक की अपील पर विचार करने से भी इनकार कर दिया।