
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से हुई 20 बच्चों की दर्दनाक मौत के मामले में आखिरकार पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। फरार चल रहे श्रीसन फार्मा के मालिक रंगराजन को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब आरोपी को मध्य प्रदेश लाया जा रहा है, जहां उससे पूछताछ के बाद कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। मामले ने दवा उद्योग की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चेन्नई
से दबोचा गया कफ सिरप
कंपनी का मालिक
छिंदवाड़ा पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी रंगराजन को चेन्नई से गिरफ्तार किया। उस पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस पिछले कई दिनों से उसकी तलाश में थी। DIG राकेश कुमार सिंह ने जानकारी देने वाले को इनाम देने की घोषणा भी की थी, साथ ही सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखने की बात कही थी। आरोपी अब एमपी पुलिस की हिरासत में है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।
कफ सिरप से बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा
जहरीली दवा पीने से छिंदवाड़ा में 17, पांढुर्ना में एक और बैतूल में दो बच्चों की मौत हो चुकी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 24 घंटे में तीन और मासूमों ने दम तोड़ दिया है। पांच बच्चे नागपुर के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। कोल्ड्रिफ कफ सिरप में पाए गए जहरीले तत्वों ने पूरे चिकित्सा तंत्र को हिला कर रख दिया है।
फैक्ट्री के अंदर मिले 350 से ज्यादा नियम उल्लंघन
तमिलनाडु सरकार की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि श्रीसन फार्मास्यूटिकल कंपनी में दवा निर्माण के दौरान 350 से अधिक गंभीर उल्लंघन पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री में प्रयोगशाला के मानक, सुरक्षा परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के बुनियादी नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। यही लापरवाही 20 मासूमों की मौत का कारण बनी।
पूछताछ से हो सकते हैं बड़े खुलासे
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रंगराजन से दवा निर्माण प्रक्रिया, कच्चे माल की आपूर्ति और लाइसेंस से जुड़ी कई जानकारियां पूछी जा रही हैं। संभावना है कि इस पूछताछ से दवा नेटवर्क और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी रोशनी पड़ेगी। राज्य सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
मासूमों की मौत पर देशभर में आक्रोश
20 बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया पर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस घटना पर रिपोर्ट मांगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारत में दवा उद्योग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।