Waiting Ticket Confirmation : त्योहारों का सीजन शुरू होते ही ट्रेनों में कंफर्म टिकट की मारामारी बढ़ जाती है। दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान दिल्ली, मुंबई और दूसरे शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जाने वाली ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट काफी ऊपर पहुंच जाती है। ऐसे में टिकट बुक करने वाले यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल रहता है कि आखिर कितनी वेटिंग तक टिकट कंफर्म हो सकती है।
कैंसिलेशन से मिलती हैं खाली सीटें
वेटिंग टिकट कंफर्म होने का कोई एक तय नंबर नहीं होता। इसकी स्थिति ट्रेन, रूट, तारीख, कोच और यात्रियों की मांग पर निर्भर करती है। रेलवे के आंकड़ों के आधार पर औसतन करीब 21 प्रतिशत यात्री बुकिंग के बाद अपनी टिकट कैंसिल कर देते हैं। इसके अलावा करीब 4 से 5 प्रतिशत यात्री टिकट होने के बावजूद ट्रेन में सफर नहीं करते। ऐसी खाली हुई सीटें वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को मिल सकती हैं।
इमरजेंसी कोटे से भी उम्मीद
टिकट कंफर्म होने की संभावना सिर्फ कैंसिलेशन पर निर्भर नहीं करती। रेलवे कुछ सीटें अलग-अलग कोटे के तहत रिजर्व रखता है। अगर किसी कोटे की सभी सीटों का इस्तेमाल नहीं होता है तो बची हुई सीटें बाद में वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को आवंटित की जा सकती हैं। इसलिए शुरुआत में ज्यादा वेटिंग दिखने के बावजूद चार्ट तैयार होने तक स्थिति बदल सकती है।
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72 सीट वाले कोच का गणित
एक सामान्य स्लीपर कोच में 72 बर्थ होती हैं। अगर औसत 21 प्रतिशत टिकट कैंसिलेशन और 4 से 5 प्रतिशत यात्रियों के यात्रा नहीं करने को आधार माना जाए, तो एक कोच में लगभग 18 सीटों की उपलब्धता बन सकती है। इसी तरह 10 स्लीपर कोच वाली ट्रेन में यह संख्या करीब 180 सीट तक पहुंच सकती है। हालांकि यह केवल औसत आंकड़ों पर आधारित अनुमान है, हर ट्रेन में इतनी सीटें खाली होंगी, यह जरूरी नहीं है।
त्योहार में बदल जाता है पूरा गणित
दिवाली और छठ के दौरान वेटिंग टिकट कंफर्म होने का सामान्य अनुमान भी अक्सर काम नहीं करता। इन दिनों बड़ी संख्या में यात्री अपने घर जाते हैं और टिकट कैंसिल कराने या यात्रा छोड़ने वालों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कम हो सकती है। यही वजह है कि त्योहारों पर WL 100, 200 या उससे ऊपर पहुंचने पर कंफर्म होने की संभावना ट्रेन और रूट के हिसाब से काफी अलग हो सकती है।
समय पर बुकिंग सबसे बड़ा हथियार
कंफर्म टिकट पाने का सबसे बेहतर तरीका है कि आरक्षण खुलते ही टिकट बुक किया जाए। सामान्य आरक्षण व्यवस्था में यात्रा से करीब 60 दिन पहले बुकिंग शुरू होती है। त्योहारों के दौरान लोकप्रिय रूट पर टिकट तेजी से भर सकते हैं, इसलिए बुकिंग खुलते ही प्रयास करना फायदेमंद रहता है। अगर संभव हो तो यात्रा की तारीख में थोड़ा बदलाव रखें और वैकल्पिक ट्रेन या कम व्यस्त रूट भी देखें। इससे कंफर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ सकती है।