मां त्रिपुर भैरवी जयंती इस वर्ष 4 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। दश महाविद्याओं में पंचम स्थान रखने वाली मां भैरवी का यह दिन साधकों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि माता की उपासना से अचानक आने वाले संकट शांत होते हैं, भय दूर होता है और जीवन में स्थिरता आती है। विशेष तौर पर वे लोग जिन्हें निरंतर बाधाओं और मानसिक उलझनों का सामना करना पड़ता है, इस दिन की पूजा से अद्भुत लाभ पाते हैं।
पूजा का महत्व और तिथि
4 दिसंबर को भैरवी जयंती पूरे देश में श्रद्धा से मनाई जाएगी। इस दिन साधक मां की उग्र लेकिन कृपालु शक्ति का आह्वान कर जीवन की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का संकल्प लेते हैं। भैरवी रूप साधक को साहस, आत्मबल और दृढ़ता प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
कैसे करें मां भैरवी की पूजा?
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर लाल वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना गया है। पूजा में लाल पुष्प, सिंदूर, काले तिल, धूप-दीप एवं गूगल की धूप का विशेष महत्व बताया गया है। भैरवी बीज मंत्र का जाप साधना को कई गुना प्रभावी बनाता है, जबकि गुड़-चने का भोग माता को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
किन लोगों के लिए है भैरवी साधना लाभकारी?
जिन्हें कार्यों में लगातार असफलता मिल रही हो, निर्णय लेने में भय या अस्थिरता महसूस हो, कोर्ट-कचहरी या नौकरी में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो—उनके लिए यह साधना बेहद शुभ मानी जाती है। नकारात्मक ऊर्जा, बाधा दोष और बुरी नजर से परेशान लोग भी इस आराधना से लाभ प्राप्त करते हैं।
कहां स्थित है त्रिपुर भैरवी का प्रसिद्ध तीर्थ?
मां त्रिपुर भैरवी का प्रमुख और पावन धाम झारखंड के देवघर स्थित त्रिकूट पर्वत पर माना जाता है। यहां माता भैरव नाथ के साथ शक्ति रूप में पूजित होती हैं। इसके अलावा त्रिपुरा के त्रिपुर सुंदरी शक्तिपीठ में भी मां भैरवी के दर्शन अत्यंत शुभ माने गए हैं।
मां भैरवी की पूजा से मिलने वाले लाभ
कहावत है कि मां भैरवी की कृपा से अचानक आने वाले संकट शांत होते हैं और जीवन में रुकी हुई प्रगति शुरू होती है। साधक के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है, मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है। परिवार में बढ़ती कलह भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।