Trump Russian Oil Tariff : रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से संभावित 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की खबरों के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार अमेरिकी प्रावधानों के विवरण का अध्ययन कर रही है। अमेरिका में नया कानून लागू होने के बाद भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है।
भारत ने अभी नहीं खोले पत्ते
पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी टैरिफ प्रावधानों से जुड़ी जानकारी अभी सामने आ रही है और भारत उसका अध्ययन करेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उचित समय पर चर्चा की जाएगी। यानी फिलहाल नई दिल्ली की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संभावित अमेरिकी कदम की स्थिति में भारत क्या रणनीति अपनाएगा।
ट्रंप को मिली टैरिफ की शक्ति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर किए। कानून रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर दबाव बढ़ाने के साथ रूसी तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देता है। इसके तहत पात्र देशों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
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भारत-चीन पर क्यों नजर
भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए दोनों देशों पर संभावित असर को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, कानून में भारत या चीन को सीधे तौर पर टैरिफ का लक्ष्य घोषित नहीं किया गया है। अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन को करना होगा कि किन देशों को इस व्यवस्था के तहत शामिल किया जाएगा और उन पर कितनी दर लागू होगी।
रूसी तेल पर भारत की निर्भरता
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापार मार्गों में बदलाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में रूसी तेल पर किसी बड़े शुल्क या आपूर्ति में बदलाव का असर भारतीय रिफाइनरियों और तेल बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका के साथ व्यापार पर असर
संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा या नहीं और लगाया गया तो उसकी दर क्या होगी। इसलिए फिलहाल भारत अमेरिकी कानून के प्रावधानों और संभावित असर का आकलन कर रहा है। आगे अमेरिकी प्रशासन के फैसले और भारत की प्रतिक्रिया से तस्वीर साफ होगी।