अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 नवंबर, 2025 को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि इस साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में कोई भी अमेरिकी सरकारी अधिकारी हिस्सा नहीं लेगा। ट्रंप ने इसका कारण बताया कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार श्वेत किसानों (Afrikaners) के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार कर रही है। उन्होंने इसे “न्याय के लिए मजबूरी” बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि भूमि जब्त करना और किसानों पर हिंसा करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे
पहले यह तय हुआ था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे, लेकिन अब वे भी इस समिट में नहीं जाएंगे। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह फैसला राष्ट्रपति की सीधी मंजूरी के बाद लिया गया है।साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने ट्रंप के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और कहा कि यह देश की छवि खराब करने के लिए फैलाया गया राजनीतिक प्रचार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद खत्म हुए तीन दशक हो चुके हैं और सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। रामफोसा ने यह भी कहा कि ट्रंप बार-बार झूठे आंकड़े और रिपोर्ट्स के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ अफ्रीकी डिप्लोमैट्स ने ट्रंप के बयान को नस्लीय राजनीति भड़काने वाला बताया है।
वैश्विक आर्थिक मंच पर भाग नहीं लेगा
ट्रंप ने हाल ही में मियामी में कहा कि दक्षिण अफ्रीका को मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के चलते G20 से बाहर कर देना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक श्वेत किसानों के साथ अत्याचार बंद नहीं होते, अमेरिका इस देश के साथ किसी भी वैश्विक आर्थिक मंच पर भाग नहीं लेगा। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब नवंबर के अंत में जोहान्सबर्ग में G20 समिट 2025 आयोजित होने वाला है, जिसमें दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक विकास, जलवायु संकट और भू-राजनीतिक स्थिरता पर चर्चा करेंगे।
सरकार भूमि अधिग्रहण
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार भूमि अधिग्रहण और हिंसा की घटनाओं को नजरअंदाज कर रही है। इसी साल अमेरिकी सरकार ने अपने शरणार्थी कार्यक्रम में बदलाव कर श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों को प्राथमिकता देने की नीति लागू की थी। दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि ये हमले जातीय नहीं बल्कि आपराधिक घटनाएं हैं, जिन्हें रंगभेद के मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है। इस विवाद ने G20 समिट से पहले दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और कड़वाहट बढ़ा दी है और वैश्विक मंच पर बहस को भी हवा दी है।