दावोस में हुई कड़ी बयानबाज़ी के बाद अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में नई दरार दिखने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए कनाडा को भेजा गया निमंत्रण वापस ले लिया है। इस कदम को पश्चिमी सहयोगियों के बीच बढ़ती असहजता और बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दावोस विवाद: बयान बने टकराव की जड़
विश्व आर्थिक मंच के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका की नीतियों पर तीखी टिप्पणी की थी। खास तौर पर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाए गए, जिसे वॉशिंगटन में नाराज़गी के साथ देखा गया। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने कनाडा को दिए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के निमंत्रण को रद्द कर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक खींचतान और खुलकर सामने आ गई।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर सहयोगियों की शंकाएं
ट्रंप की इस नई पहल को लेकर कई मित्र देशों में भी संदेह जताया जा रहा है। कुछ नेताओं का मानना है कि इस संस्था की संरचना अत्यधिक केंद्रीकृत हो सकती है और इसका नेतृत्व लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के हाथ में रहने से वैश्विक संतुलन प्रभावित हो सकता है। साथ ही यह भी चिंता है कि ऐसी नई व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मंचों की भूमिका को कमजोर कर सकती है।
अमेरिकी सहयोगियों में बढ़ती बेचैनी
हाल के महीनों में अमेरिका के कई साझेदार देशों ने ट्रंप की विदेश नीति को लेकर खुलकर असंतोष जताया है। दावोस से लौटते समय कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि वैश्विक राजनीति “नई और अनिश्चित दिशा” में बढ़ रही है, जहां अचानक लिए गए फैसले व्यापारिक प्रतिबंधों या कूटनीतिक दबाव का कारण बन सकते हैं। इस अस्थिरता ने सहयोगी देशों को वैकल्पिक रणनीतियों पर सोचने को मजबूर कर दिया है।
ट्रंप-केंद्रित शासन शैली और उसका असर
अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही ट्रंप मजबूत, व्यक्तिगत नेतृत्व की वकालत करते रहे हैं। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने और अधिक आत्मविश्वास के साथ उसी शैली को आगे बढ़ाया है। समर्थकों के लिए यह निर्णायक नेतृत्व है, लेकिन आलोचकों के अनुसार इससे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों में भरोसे की कमी पैदा हो रही है और देश अपने हितों की रक्षा के लिए नए गठजोड़ तलाशने लगे हैं।
कार्नी और यूरोप से उठती आवाजें
कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी अब उन नेताओं में गिने जा रहे हैं जो मध्यम शक्तियों को एकजुट होकर महाशक्तियों के दबाव का सामना करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सहयोग, नियम-आधारित व्यवस्था और सामूहिक ताकत पर जोर दिया। इसी क्रम में यूरोप से भी अमेरिकी नीतियों पर सवाल उठे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि ट्रंप के फैसलों को लेकर पश्चिमी जगत में मतभेद गहराते जा रहे हैं।